अमौली (फतेहपुर)। शासन का दिसंबर तक किसानों को अन्ना मवेशियों से निजात दिलाने का वादा धरातल पर नहीं उतर पाया। दिन में खेती करने के बाद किसान सर्द रात में फसलों की पहरेदारी करते हैं। अधिकारियों से शिकायत पर किसानों को महज आश्वासन ही मिलता है।
जिले एवं अमौली ब्लाक के अंतिम छोर यमुना तटवर्ती क्षेत्र में लगभग 200 अन्ना मवेशी दिन में परसेढ़ा के जंगलों में विचरण करते हैं। रात होते ही झुंड बनाकर खेतों में घुसकर फसल चट कर देते हैं। फसलों को बचाने के लिए दपसौरा, परसेढ़ा, जारा, चकलाला, निम्दापुर, गंगूपुर, श्यामपुर सहित कई गांवों के किसान रात भर खेतों में मचान बनाकर रतजगा करने को मजबूर हैं। खदेड़ने पर अन्ना मवेशी आक्रामक हो जाते हैं। परसेढा के धनंजय सिंह, विष्णु तिवारी, चंद्रपाल, जारा के छोटेलाल, रामकुमार सहित अन्य लोगों ने बताया कि विधायक और अधिकारियों के कई आश्वासनों के बाद भी किसानों को कुछ भी हासिल नहीं हुआ।
गंगूपुर के गणेश कुमार यादव ने बताया कि ग्रामीणों के साथ मिलकर प्रधान और बीडीओ से कई बार शिकायत की। दिसंबर बीत गया लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। अन्ना मवेशियों से फसल बचाना किसी चुनौती से कम नहीं है।
गांव के रामबाबू विश्वकर्मा ने बताया कि दिन भर खेती के कार्य में लगना पड़ता है और फसल बचाने के लिए सारी रात मचान में बैठकर जागना पड़ता है। खदेड़ने के दौरान मवेशी कई बार फसल भी बर्बाद कर चुके हैं।
मेरे पास मंगलवार को ग्रामीण आए थे। उनसे अन्ना मवेशियों को बुढ़वा या टकौली गोशाला भेजने को कहा था लेकिन वे नहीं ले गए। शीघ्र ही दपसौरा में गोशाला बनकर चालू हो जाएगी। इसके बाद सभी अन्ना मवेशी वहां भेज दिया जाएगा।
विपुल विक्रम सिंह, बीडीओ