बिंदकी। महरहा गांव स्थित राम जानकी शिव मंदिर में आयोजित नौ दिवसीय रामकथा के छठवें दिन कथा वाचक ने भगवान राम के वनवास व केवट प्रसंग का वर्णन किया।
कथा का आरंभ करते हुए कथा वाचक अरविंद मिश्रा ने बताया कि किस प्रकार महाराज दशरथ के वचन पालन के लिए भगवान राम, माता सीता व भ्राता लक्ष्मण ने राजसुख त्यागकर वनवास को स्वीकार किया। उन्होंने केवट प्रसंग का वर्णन किया। बताया कि भगवान राम गंगा पार करने पहुंचे, तो केवट ने भगवान के चरण धोने के बाद ही उन्हें अपनी नाव में बैठाने का अनुरोध किया। इस प्रसंग में केवट की भक्ति और भगवान राम की विनम्रता ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कथा व्यास ने कहा कि केवट प्रसंग हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति में जाति, धर्म और सामाजिक बंधनों का कोई स्थान नहीं है। भगवान केवल भाव को देखते हैं, न कि बाहरी स्वरूप को। इस मौके पर मंदिर के पुजारी श्रवण प्रकाश शुक्ला, मुख्य जजमान नागेंद्र त्रिपाठी, अधिवक्ता मुकेश जोशी, जय प्रकाश नारायण तिवारी, उमादत्त तिवारी, कृष्णा अवस्थी, सरयू तिवारी सहित तमाम लोग मौजूद रहे।