फोटो-06-आंजनेय कुमार सिंह
- इंटर की परीक्षा सेकेंड डिवीजन से उत्तीर्ण करने के बाद भी चुनौतियों से नहीं मानी हार
- मुरादाबाद के कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह तीसरे और अंतिम प्रयास में बने आईएएस
संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहपुर। आईएएस आंजनेय कुमार सिंह ने हाईस्कूल की परीक्षा में टॉप किया, लेकिन वह ओवर कॉन्फिडेंस का शिकार हो गए। इसके बाद पढ़ाई में लापरवाही का नतीजा रहा कि वह टॉपर से इंटर की परीक्षा में सेकेंड डिवीजन पर आ गए। शिक्षक के पुत्र का सेकेंड डिवीजन में पास होना फेल होने के बराबर था। इस कारण उन्हें बेहद शर्मिंदगी हुई। खुद को अवसाद से उबारते हुए उन्होंने फिर एकाग्रता और लगने के साथ पढ़ाई शुरू की और आईएएस का मुकाम हासिल कर लिया।
आंजनेय कुमार सिंह का कहना है कि बोर्ड परीक्षा की मेरिट कॅरियर का निर्धारण नहीं करती। प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल करने के लिए टॉपर होना जरूरी नहीं। सामान्य मेरिट वाले भी लगन के साथ मेहनत करके प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल कर सकते हैं। इंटर की परीक्षा सेकेंड डिवीजन से उत्तीर्ण करने वाले अपने जिले में ही डीएम रह चुके आंजनेय कुमार सिंह इसकी मिसाल हैं। मौजूदा समय वह मुरादाबाद में कमिश्नर के पद पर तैनात हैं।
वरिष्ठ आईएएस का कहना है कि 1991 में इंटर में सेकेंड डिवीजन आने से वह कुछ समय समय के लिए निराश जरूर हुए, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। इसके बाद उन्होंने पूर्वांचल और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से आगे की पढ़ाई की और हमेशा अच्छे मार्क्स रहे। मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद पिता के शिष्य रहे एक संपादक के अखबार में पत्रकारिता करनी शुरू की। पिता से संबंध होने के कारण संपादक का उनके प्रति भावनात्मक जुड़ाव भी रहा। यहीं वजह थी कि एक दिन संपादक ने आईएएस की तैयारी करने के लिए।
बकौल आंजनेय उन्होंने इसके लिए मना कर दिया। उनकी यह बात संपादक को इस कदर नागवार लगी कि उन्होंने उनकी प्रतिभा पर सवाल खड़ा करते हुए बोले-कि यह क्यों नहीं कहते कि तुम आईएएस की परीक्षा क्रैक हीं नहीं कर सकते। संपादक का यह कहना मन की गहराइयों में उतर गया। उन्होंने हर हाल में आईएएस परीक्षा उत्तीर्ण करने की ठान ली।
एक साल के लिए पत्रकारिता भी की। यहीं से जीवन में टर्निंग प्वाइंट आया। इस दौरान पिता जी के शिष्य रहे एक संपादक ने आईएएस की तैयारी करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने इसे चुनौती के रूप में लिया।
प्रयागराज में तैयारी की और पहले दो प्रयासों के बाद तीसरे में 2005 की आईएएस की परीक्षा में चयनित हो गए। मऊ जिला निवासी आईएएस आंजनेय कुमार सिंह एक सामान्य परिवार से हैं। उनका जन्म मऊ जिले के सलाहाबाद गांव में हुआ।
किताबों और समाचार पत्रों से ही नोट्स बनाएं
बकौल आंजनेय कुमार सिंह यूपीएससी की तैयारी में कक्षा 5 से 12 वीं तक एनसीआरटी की किताबों और समाचार पत्रों से ही नोट्स बनाए जाते हैं। नोट्स तैयार करने के लिए लिखना पड़ता है। लिखने से पाठ या विषय आसानी से याद हो जाता है।
बच्चों के दोस्त न बने, बल्कि दोस्ताना व्यवहार रखकर उनके बारे में जानें
वरिष्ठ आईएएस आंजेनय कुमार सिंह कहना है कि टेक्नोलॉजी का गलत और ज्यादा उपयोग परिवार से लोगों को दूर कर रही है। परिवार को अब अपनों के लिए वक्त निकालना होगा। बच्चों के दोस्त न बने, बल्कि दोस्ताना व्यवहार रखकर उनके बारे में जानें। कहा कि अपने दिशा अनुरूप ध्येय बनाने की जरूरत है। जैसे सूरज की रोशनी चारों ओर फैली रहती है, लेकिन लेंस से एक जगह समाहित करने से उसी रोशनी से आग तक लग जाती है। बच्चों को खुद को बस पहचानने की जरूरत है।