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Fatehpur News: टैटू गोदवाने के साथ जानलेवा बीमारियां भी लेकर लौट रहे

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फतेहपुर। टैटू गोदवाने, सेविंग में ब्लेड न बदलने से लोग संक्रमण की गिरफ्त में आ रहे हैं। खासकर फैशन के ट्रेंड के साथ चलने वाले युवा इसके सबसे ज्यादा शिकार हो रहे हैं।
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यहीं कारण है कि ब्लड बैंकों में रक्तदान के लिए पहुंचने वाले 15 से 20 फीसदी युवा अयोग्य निकल रहे हैं। ऐसे युवा हेपेटाइटिस बी और सी समेत सिफलिस से संक्रमित मिल रहे हैं। उन्हें वापस कर दिया जाता है और खानपान व इलाज की सलाह दी जाती है।

जिले में चार रक्तदान केंद्र हैं। इनमें जिला अस्पताल, मानस, श्याम और आभा ब्लड बैंक हैं। सर्वे फॉर ह्यूमेनिटी संस्था लोगों को प्रेरित करके उन्हीं ब्लड बैंकों में रक्तदान कराती है। संस्था के मैनेजर गुरुमीत सिंह ने बताया कि सबसे ज्यादा 25 से 45 साल के युवा रक्तदान करते हैं। साल में औसतन 600 यूनिट ब्लड डोनेट कराते हैं। इनमें 100 से 120 लोग संक्रमित बीमारियों से ग्रस्त पाए जाते हैं।
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सबसे ज्यादा हेपेटाइटिस-बी के मामले आते हैं। इसके बाद हेपेटाइटिस-सी और सिफलिस के मरीज मिलते हैं। सबसे कम एचआईवी और अन्य बीमारियों के रक्तदाता मिलते हैं। मानस ब्लड बैंक के संचालक कैलाश ने बताया कि उनके यहां साल में 800 से 1000 लोगों का रक्तदान कराया जाता है। इनमें से करीब 150 लोग अयोग्य निकलते हैं। इनमें हेपेटाइटिस-बी, हेपेटाइटिस-सी और सिफलिस जैसे सभी संक्रामक मामले शामिल हैं।

जिला अस्पताल में भी 1200 से 1300 रक्तदाता रक्तदान करते हैं। हालांकि यहां संक्रामक बीमारियों के मामले कम आते हैं। उन्हें काउंसलिंग से पहले ही छांट दिया जाता है। इस तरह यहां संक्रमित रक्तदाताओं का आंकड़ा महज 2.5 से तीन फीसदी ही है। यानी साल में 30 से 35 संक्रमित रक्तदाता आते हैं। इसके अलावा अल्कोहल इस्तेमाल करने के कभी-कभार एक दो मामले आते हैं।
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक की परामर्शदाता डॉ. दीपाली वर्मा ने बताया कि युवाओं में टैटू के चलन से ऐसे मामले बढ़ रहे हैं। लोग अप्रशिक्षित से टैटू बनवाते हैं, जो संक्रमित सूई का इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा सेविंग कराने में ब्लेड न चेंज कराने और नवजात बच्चे को हेपेटाइटिस बी-सी का टीका न लगवाने से भी लोग संक्रमित मिल रहे हैं। इससे बचाव के लिए बच्चा पैदा होने के तत्काल बाद हेपेटाइटिस बी-सी का टीका लगवाएं। टैटू और दाढ़ी बनवाते समय अपने सामने सूई और ब्लेड का प्रयोग करवाएं।

ब्लड डोनेशन के लिए योग्यता

18 से 65 साल तक के स्वस्थ लोग रक्तदान कर सकते हैं। उनका वजन कम से कम 45 साल और हीमोग्लोबिन 12.5 से ऊपर होना चाहिए। एक बार हेपेटाइटिस बी-सी और सिफलिस होने के बाद कोई भी शख्स आजीवन रक्तदान नहीं कर सकता।
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