फतेहपुर। साक्षर भारत योजना में कई ब्लाक के प्रेरकों को कई महीनों से मानदेय नहीं मिला है। ऐसे में इनकी दिवाली का त्योहार किस तरह से मनाएं। हालात यह है कि पिछले कई त्योहार कर्ज लेकर मनाने वाले प्रेरकों को दिवाली के लिए कर्ज भी मांगे नहीं मिला है। योजना के तहत हर ग्राम पंचायत स्तर पर एक पुरुष व एक महिला प्रेरक की नियुक्ति हुई है। प्रेरकों का काम गांव के अनपढ़ को साक्षर करना है। इसके लिए बाकायदा हर ग्राम पंचायत स्तर पर एक-एक शिक्षा सेवा केंद्र खुले हैं। इन केंद्रों के तमाम प्रेरक मानदेय को लंबे समय से तरस रहे हैं। अगर जिले के सभी तेरह ब्लाक की बात करे तो इनमें से कम से कम आधा दर्जन ब्लाक के प्रेरक मानदेय न मिलने का रोना महीनों से रो रहे हैं। अगर भिटौरा ब्लाक की ही बात करे तो इस ब्लाक के प्रेरक पूरे दो साल से मानदेय को तरस रहे हैं। ब्लाक के लौगांव के प्रेरक ओम प्रकाश, बेरा गढ़ीवा के प्रेरक जय प्रकाश मिश्र व बड़ा गांव के प्रेरक सुरेश राम ने बताया कि बिना मानदेय के कई त्योहार कर्ज लेकर करने पड़े हैं। इस त्योहार में तो कोई कर्ज भी देने को तैयार नहीं हुआ। इस बाबत जिला समन्वयक कुलदीप गंगवार ने बताया कि लखनऊ स्तर से मानदेय में पेंच होने से यह स्थित पैदा हुई है। जिले भर की समस्त 786 ग्राम पंचायतों में से करीब 94-95 ग्राम पंचायतों को इस मद का पैसा नहीं मिला था। इन ग्राम पंचायतों के लिए 19 अक्तूबर को पैसा रिलीज किया जा चुका है। अभी 15 ग्राम पंचायतों को पैसा नहीं आया है। जल्द से जल्द इन ग्राम पंचायतों का भी पैसा खाता में पहुंच सके।