फतेहपुर। इस भू-भाग को फतेहपुर जनपद का दर्जा 187 साल पहले मिला था। इससे पहले इलाहाबाद और कानपुर जनपद में इसके परगना शामिल रहे हैं। 31 अगस्त 1826 को दोनों जिलों से 13 परगना अलग करके फतेहपुर जनपद की स्थापना की गई थी। दस नवंबर 1801 में नवाब वाजिद अली को ईस्ट इंडिया कंपनी को रूहेलखंड और दक्षिण दोआबा, जिसमें यह भू-भाग शामिल था को देना पड़ा था। इसके बाद से यह भू-भाग अंग्रेजों के कब्जे में रहा। इस दौरान यहां के सभी परगना कभी कानपुर तो कभी इलाहाबाद में शामिल किए जाते रहे। 1814 ईसवी में फतेहपुर के नाम से पहली बार जिला बनाने का प्रश्न उठा और गंगा किनारे भिटौरा में ज्वाइंट मजिस्ट्रेटी की स्थापना की गई। असुविधा को देखते हुए ज्वाइंट मजिस्ट्रेटी को भिटौरा से 1825 में फतेहपुर लाया गया। 18 जुलाई 1803 ईसवी से 1814 ईसवी तकइलाहाबाद में जज मजिस्ट्रेटी का काम करते रहे थे। इसके बाद ज्वाइंट मैजिस्ट्रेटी भिटौरा के अंतर्गत कानपुर जिले के चार थाने कोड़ा, अमौली, खजुहा और बिंदकी तथा इलाहाबाद जिले के छह थाने फतेहपुर, गाजीपुर, हंसवा, एकडला, हथगाम व कड़ा को शामिल किया गया। 31 अगस्त 1826 ईसवी को कानपुर और इलाहाबाद में शामिल परगना कोड़ा, कड़ा को 13 परगनों में विभक्त करके प्रथम बार फतेहपुर को अलग जिला बनाया गया। फौजदारी और दीवानी कड़ा तक इसी जिले में तथा माल इलाहाबाद के जिम्मे रखा गया। 1841 ईसवी में दीवानी, फौजदारी परगना कड़ा भी जिला इलाहाबाद में आ गया। इस प्रकार से यह भू-भाग फतेहपुर के नाम से गवर्नर जनरल लार्ड एमहर्स्ट के समय 31 अगस्त 1826 को बना और अभी तक इसी नाम से चला आ रहा है।