हंसवा/फतेहपुर। चमचमाती गाड़ी, लकदक पोशाक और पक्का घर...! जी हां जनाब, आपके लिए यह सब संपन्नता और अमीरी की पहचान होगी, मगर हंसवा विकास खंड क्षेत्र में यह सारे मानक गरीबी की पहचान बने हैं। हंसवा विकास खंड क्षेत्र की लगभग दो दर्जन ग्राम पंचायतों में कुछ ऐसे ही सफेदपोश लोगों को गरीबी रेखा के नीचे के लोगो के हिस्से के आवासों का आवंटन कर दिया गया है। हंसवा विकास खंड की कुल 56 ग्राम पंचायतों में 356 गरीबों को इंदिरा आवास योजना के अंतर्गत आवास मुहैय्या कराने का लक्ष्य दिया गया। आवास के लिए 70-70 हजार का बजट भी आवंटित किया गया है। मानक के मुताबिक आवास ऐसे लोगों के नाम आवंटित किए जाने चाहिए, जिनके सिर पर पक्की छत न हो और न ही कमाई का कोई पुख्ता जरिया हा, लेकिन योजना का क्रियान्वयन अजब-गजब तरीके से किया गया। विकास खंड क्षेत्र की बहरामपुर, चकरसूलाबाद, कोर्रा सादात, एकारी, टीसी, सातों धरमपुर, सातों नरैनी और मुरांव सहित तकरीबन 25 ग्राम पंचायतों में मानकों की धज्जियां उड़ाते हुए गांव के रसूखदार अमीर लोगों को इंदिरा आवासों का आवंटन कर दिया गया। शिकायतों की प्रधान और पंचायत अधिकारी स्तर पर जब सुनवाई नहीं हुई तो मसला ब्लाक प्रमुख इंद्रसेन यादव के पास पहुंचा। यादव ने बीडीओ से जांच को कहा। बीडीओ ने इंदिरा आवास आवंटन की पात्रता सूची और उनके पात्रों के भौतिक सत्यापन की क्रास चेकिंग कराना शुरू किया तो पूरी पोल खुल गई। बहरामपुर में 14 और चकरसूलाबाद में 8 अपात्रों के नाम इंदिरा आवासों के आवंटन में पाए गए। अपात्रों के नामों का खुलासा होने पर बीडीओ धीरेंद्र यादव ने तत्काल प्रभाव से सभी 22 अपात्रों के खातों को सीज करते हुए धनराशि वापस ले ली है। उन्होंने बताया कि और भी अन्य ग्राम पंचायतों की शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनकी पड़ताल की जा रही है। ब्लाक प्रमुख इंद्रसेन यादव ने बताया कि लगभग 150 इंदिरा आवास अपात्रों को दिए जाने की सूचना प्राप्त हुई है। जांच रिपोर्ट आने पर अपात्रों को आवास दिए गए हैं तो उनसे सरकारी धनराशि की वापसी करवाई जाएगी।