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जिले में 39 परिषदीय स्कूलों में बंद हैं ताले

Sat, 24 Nov 2012 12:00 PM IST
Fatehpur
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फतेहपुर। प्राथमिक शिक्षा की जमीनी हकीकत को देखकर लगता है कि अनिवार्य शिक्षा अधिनियम ठंडे बस्ते में चला गया। बीएसए के लाख प्रयासों के बावजूद अभी तक 39 परिषदीय स्कूलों में ताले झूल रहे हैं। इन स्कूलों के बच्चे जंगल में मवेशी चरा रहे हैं। बीएसए का कहना है कि जिला में शिक्षकों की कमी के कारण कुछ स्कूल शिक्षक विहीन हैं, जिनका संचालन नजदीकी स्कूलों के टीचरों को संबद्ध करके कराया जा रहा है। जिले में अनिवार्य शिक्षा अधिनियम का सही तरीके से क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है। अधिनियम के तहत प्रत्येक बच्चे को अनिवार्य रूप से शिक्षा पाने का अधिकार है, लेकिन ठीक इसके विपरीत जिले में नौ प्राथमिक और 29 उच्च प्राथमिक स्कूल ऐसे हैं, जिनमें टीचर न होने के कारण ताले झूल रहे हैं। विजईपुर ब्लाक में एक, धाता में चार, खजुहा में तीन तथा भिटौरा में दो मिलाकर कुल नौ प्राथमिक स्कूल शिक्षक विहीन हैं। इनमें संबद्ध शिक्षक कभी कभार पहुंचकर औपचारिकता निभाकर चलते बनते हैं। इनके अलावा मलवां में एक, खजुहा में सात, भिटौरा में एक, असोथर में दो, बहुआ में तीन, धाता में सात, हथगाम में बारह तथा हंसवा में चार मिलाकर कुल 29 उच्च प्राथमिक विद्यालय शिक्षक विहीन हैं। इन स्कूलों छात्र-छात्राएं तो पंजीकृत हैं, लेकिन पढ़ाने वाला कोई नहीं है। उदाहरण के तौर पर असोथर ब्लाक के उच्च प्राथमिक विद्यालय सरकंडी दो साल से टीचर विहीन है। इस स्कूल में 136 बच्चे पंजीकृत हैं। स्टाफ के नाम पर एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की नियुक्ति है। इसी परिसर में एक प्राथमिक विद्यालय संचालित है। इसमें 346 बच्चे पंजीकृत हैं। इस स्कूल में एक शिक्षक की तैनाती है। इसी टीचर को बेसिक शिक्षा विभाग ने उच्च प्राथमिक विद्यालय में सबद्ध कर रखा है। एक मात्र टीचर दोनों स्कूलों का संचालन कैसे करता होगा। इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। जिले में यह अनिवार्य शिक्षा अधिनियम का सच उजागर करता है। खास बात तो यह है कि प्रमुख सड़कों के ऊपर स्थित विद्यालयों मानक से अधिक टीचरों की नियुक्ति है। इसका खुलासा पिछले दिन जिलाधिकारी कंचन वर्मा के शाह उच्च प्राथमिक विद्यालय के निरीक्षण के दौरान उजागर हो पाया। इस स्कूल में तीन के बजाए सात टीचर कार्यरत पाए गए, जबकि छात्र संख्या सौ के भीत पाई गई। बीएसए राजेंद्र प्रसाद यादव का कहना है कि गैरजनपदों से आने वाले टीचरों की नियुक्ति करके बंद स्कूल खोले जा रहे हैं। जल्द ही सभी स्कूल खोल दिए जाएंगे।
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