फतेहपर। मुलायम सिंह यादव के जन्मदिन पर पचास हजार तक की ऋण माफी की घोषणा किसानों के साथ धोखा है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने किसानों द्वारा सहकारी बैंकों से लिया गया कर्जा माफ करने के पीछे सहकारी नेताओं और समिति के सचिवों को लाभ पहुंचाने का काम किया है। इससे किसानों को मामूली लाभ मिल सकता है। किसान नेता एवं बीकेडी के जिलाध्यक्ष रामदत्त मिश्रा का कहना है कि ज्यादातर किसानों ने ग्रामीण बैंक से कर्जा ले रखा है। सहकारी बैंकों का सिर्फ कर्जा माफ करने सेे भला होने वाला नहीं। सहकारी बैंकों से कर्जा सिर्फ सहकारी नेताओं को मिलता है। भाकियू के जिलाध्यक्ष राजकुमार सिंह गौतम का कहना है कि अगर सपा सरकार किसानों को लाभ पहुंचाना चाहती होती, तो सभी बैंकों का किसान ऋण माफ करती। लेकिन सरकार ने सिर्फ सहकारी बैंकों का ऋण माफ करने की घोषणा करके अपनी किसान विरोधी मानसिकता साफ कर दी है। इस निर्णय से सहकारी नेता और समितियों के सचिवों को ही लाभ पहुंचेगा। असोथर ब्लाक के सरकंडी गांव निवासी किसान यशवंत सिंह का कहना है कि समिति का सदस्य होने के बावजूद उन्हें ऋण नहीं दिया जाता है। यह व्यवस्था पिछले कई सालों से चल रही है। किसान क्रेडिट कार्ड भी सहकारी बैंकों से नहीं जारी किए गए हैं। ऋण माफी की घोषणा धोखा है। विजईपुर ब्लाक के रेवाडी गांव निवासी इकबाल सिंह कहते हैं कि सरकार को पचास हजार रुपए तक का सभी बैंकों का कर्जा माफ करने का निर्णय लेना होगा।