फतेहपुर। जिले में लघु और मध्यम उद्योग लगाने के लिए जिला उद्योग विभाग ने आठ स्थानों को चिह्नित किया। इन स्थानों पर मूलभूत सुविधाओं के साथ पार्क व विभाग का ऑफिस भी तैयार किया। उद्योग लगाने के नाम पर लोगों ने जमीन भी आवंटित कराई, लेकिन उद्योग अब तक स्थापित नहीं हो सके। अब ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से इन औद्योगिक क्षेत्रों में उद्योग लगने की आस दोबारा जगी है।
जिले में डेढ़ दशक पहले उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए आठ स्थानों को औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित किया गया। हर औद्योगिक क्षेत्र में 40 से 50 जमीनों के भूखंड उद्योगों के लिए तैयार किए गए। इन भूखंडों को उद्योग लगाने के नाम पर लोगों ने आवंटित भी करा लिया, लेकिन उद्योग स्थापित नहीं किए। विभाग ने भी भूखंड में उद्योग स्थापित करने पर न तो जोर दिया और न ही निरस्त करने की औपचारिकताएं पूरी कीं।
इसलिए ये कई सालों से रिक्त पड़े हुए हैं। सरकारी प्रक्रिया की सुस्त चाल से नए उद्यमियों को जमीन उपलब्ध नहीं हो पा रही है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के बाद उद्यमियों में उद्योग लगाने को लेकर माहौल बना है। उद्योग विभाग भी अब सजग हुआ है और जमीन आवंटित करा चुके स्वामियों को नोटिस भेज रहा है। ये प्रक्रिया कागजों से बाहर आएगी, तभी इन वीरान औद्योगिक क्षेत्रों में उद्योग की हरियाली की फसल लहराएगी।
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इनसेट
जमीन पर कब्जा, उद्योग से दूरी
1. जगत सराय- 46 भूखंडों में 45 आवंटित हैं। यहां सिर्फ दो इकाइयां की कार्यरत हैं।
2, रामपुर थरियाव- कुल 48 में 41 भूखंड आवंटित हैं। यहां सिर्फ 4 उद्योग संचालित हैं।
3. त्रिलोकीपुर- कुल 41 भूखंड में सिर्फ 5 में उद्योग चल रहे हैं।
4. सुजरही (खागा के पास)- 41 भूखंड आवंटित हैं। इसमें महज 2 इकाइयां ही काम कर रही हैं।
5. इटरोरा-पिलकिनी- 52 भूखंड में सिर्फ 2 इकाइयां ही शुरू हैं।
6. चकहाता (बिंदकी)- कुल 36 भूखंड में 32 आवंटित हैं। एक भी इकाई यहां स्थापित नहीं की गई।
7. चौडगरा- कुल 51 भूखंड और 10 शेड हैं, जो सभी आवंटित हैं। यहां महज 16 इकाइयां ही संचालित हो रही हैं।
8. सदवापुर- 45 में 40 भूखंड आवंटित हैं। एक भी इकाई यहां कार्यरत नहीं है।
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इनसेट
848 करोड़ से ज्यादा एमओयू को चाहिए जमीन
जिले के इन्वेस्टर्स समिट में 848 करोड़ से अधिक के एमओयू हुए। इन्हें स्थापित करने के लिए भूखंड चाहिए। अभी अधिकांश भूखंड आवंटित हैं। ऐसे में नए उद्यमियों का जिले में निवेश करना है, तो भूखंड उपलब्ध कराने होंगे। इसके लिए सालों-साल से आवंटित भूखंडों को निरस्त कर नई जमीन तैयार करनी होगी।
वर्जन
जो उद्यमी काम नहीं कर रहे हैं। उन्हें अंतिम नोटिस भेजी जाएगी। वे उद्योग लगाए, वरना जमीन निरस्त कर नए उद्यमियों को भूखंड तय प्रक्रिया से आवंटित किए जाएंगे। जगतसराय और त्रिलोकपुर मेें अंतिम नोटिस भेजी जा चुकी है। अन्य स्थानों पर भी जल्दी नोटिस भेजेंगे। -अंजनीश प्रताप सिंह, उद्योग उपायुक्त, फतेहपुर