(अभियान: अन्ना दाता का दर्द न जानें कोय)
फोटो- 9- बेमौसम बारिश से बर्बाद हुई गेहूं की फसल (फाइल फोटो)
ओलावृष्टि से बर्बाद हुई 22 हजार हेक्टेयर की फसलें
- सबसे ज्यादा गेहूं की फसल में हुआ नुकसान
- कृषि विभाग को बीमा कंपनी ने दी सर्वे रिपोर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहपुर। बेमौसम बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि में 22 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में फसलों का नुकसान हुआ है। इसमें सबसे ज्यादा गेहूं की फसल का नुकसान हुआ है। बीमा कंपनी ने कृषि विभाग को सर्वे रिपोर्ट दी है। बीमा कंपनी की ओर से फसलों के नुकसान की भरपाई की जाएगी।
रबी सीजन में गेहूं, चना की फसलें पक कर तैयार हैं। राई, सरसों की फसलों को काटकर किसानों से सुरक्षित कर लिया है, लेकिन कुछ क्षेत्र में पिछैती राई, सरसों की फसलें खड़ी थी। तभी 30 मार्च को तेज हवा के साथ बेमौसम बारिश शुरू हुई और 31 मार्च को जोरदार ओलावृष्टि हुई। इसमें गेहूं की फसल में करीब 15 हजार हेक्टेयर, चना की फसल में छह हजार हेक्टेयर, 800 हेक्टेयर जौ की फसल, 150 हेक्टेयर सरसों, राई और एक हजार हेक्टेयर हरी सब्जी की फसलों का नुकसान हुआ है। सबसे ज्यादा अमौली ब्लाक के बरमपुर, सरहन, कुलखेड़ा, मदरी, चतनपुर, देवचली, आजमपुर गढ़वा, बुढ़वा, नोनारा, मंगलपुर टकौली, कलाना, रनूपुर, बिरनई, बेहटा, बेहटी, कोठा बखरिया गांव में नुकसान हुुआ है।
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इन गांवों में ओलावृष्टि से हुआ नुकसान
अमौली, दपसौरा, मवई, रुस्तमपुर, सिकंदरपुर, मकरंदपुर, काहिजरा, कुलखेड़ा, गढ़वा, बुढ़वा, लहुरी सरांय, न्योरी, धरमपुर सराय, बंथरा, बिरनई, बेहटा, बेहटी, बबुरिहापुर, जजमोईया, निरखी, मंगलपुर टकौली, बरमपुर, सरहन, कुलखेड़ा, मदरी, चतनपुर, देवचली, अयोध्या नगर, कचौरा, शाहजहांपुर खालसा, सिठर्रा, कुशल का डेरा, पूरनपुर समेत अन्य कई गांवों में फसलों का नुकसान हुआ है।
इनसेट
250 किसानों ने किए दावे
ओलावृष्टि से बर्बाद हुई फसलों का सर्वे नहीं हुआ तो किसानों ने कृषि विभाग के कार्यालयों में शिकायतें दर्ज कराई है। 250 किसानों ने दावे किए हैं कि दैवीय आपदा से गेहूं, चना, जौ की फसलों का नुकसान हुआ है। अभी तक फसल बीमा कंपनी की ओर से सर्वे नहीं किया गया है। टीम को भेज कर खराब हुई फसलों का सर्वे कराया जाए।
.................. कोट:
ओलावृष्टि से हुए नुकसान का अभी सर्वे चल रहा है। कुछ टीमों ने रिपोर्ट दी है, जिसमें 22 हजार हेक्टेयर फसलों का नुकसान होना पाया है। पूरा सर्वे के बाद सही नुकसान का क्षेत्रफल तय किया जाएगा। इसके बाद बीमा कंपनी से किसानों को मुआवजा दिलाया जाएगा।
- राममिलन सिंह परिहार, उप कृषि निदेशक