फर्रुखाबाद। शहर के महावीर स्वामी दिगंबर जैन मंदिर में 10 दिन से चल रहे पर्युषण पर्व का अष्ट द्रव्यों से नित नियम पूजन, अभिषेक और शांतिधारा के साथ समापन हो गया। वक्ता कन्हैयालाल जैन ने कहा कि पर्यूषण पर्व दस धर्म रूपी तरंगों से बाहर करता है।
मोहल्ला जोगराज स्थित मंदिर में इंद्रों के वेश में कन्हैयालाल जैन, कमल कुमार जैन, अभिषेक जैन, रोमिल जैन, नीरज जैन आदि ने भगवान शांतिनाथ की अभिषेक शांति धारा की। इसके बाद अष्ट द्रव्यों जल, चंदन पुष्प, नैवेद्य, दीप, धूप, फल व अर्घ्य से पूजन किया। वक्ता कन्हैया लाल जैन ने कहा कि क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम, तप, त्याग, आकिंचन, ब्रह्मचर्य दस धर्म के दस लक्षण हैं। क्षमा वाणी का पर्व सौहार्द, सौजन्यता एवं सद्भावना है।
शांतिधारा का महत्व बताते हुए कहा कि 15वें तीर्थंकर धर्मनाथ के बाद धर्म का लोप हो गया। 16वें तीर्थंकर शांतिनाथ के बाद दोबारा शुरू हुआ। इसका उद्देश्य शांति को विश्व में प्रवाहित करना है।
इस मौके पर सुरेंद्र सफ्फड़, विमल शरन जैन, नीरज रस्तोगी, पूनम जैन, मणि जैन, आरती जैन, ममता जैन, आकांक्षा, नीलम आदि मौजूद रहे।
राजेश मिश्रा