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Farrukhabad News: आंसुओं को पोंछ साहस से बढ़ाए कदम, दूसरों को भी रोजगार

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संवाद न्यूज एजेंसी
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कमालगंज। पति के ब्लड कैंसर से निधन के बाद आंखों से बहते आंसू रीना की नियति बन गए। आखिर आंसुओं ने ही साहस और हौसलों की पटकथा लिख दी। सिलाई सीखकर हिम्मत से कदम बढ़ाए तो स्वावलंबन के फूल खिलने लगे। बड़ी बेटी को पढ़ाकर नौकरी की सौगात दी। अन्य महिलाएं भी उनकी प्रेरणा से रोजगार की बगिया सींच रहीं।
कंधरापुर की रीना देवी के पति पोस्टमैन राजेश श्रीवास्तव का निधन ब्लड कैंसर से 2014 में हो गया। इलाज में काफी कर्ज भी चढ़ गया। उस समय सबसे छोटी बेटी व पांच माह की सौम्या गोद में थी। उन पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा, आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। पढ़ाई व कर्ज उतारने की चिंता के बीच उन्होंने आंसुओं के सैलाब को हौसलों के सांचे में ढालने का प्रण किया।
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साल भर बाद उन्होंने अंबेडकर महिला स्वयं सहायता समूह का गठन कर 11 महिलाओं को जोड़ा। कपड़े की सिलाई सीखने के बाद समूह के पैसे से खुद की सिलाई मशीन खरीदी। घरेलू कपड़ों के साथ बच्चों की यूनिफार्म सिलने लगीं। रानी, अनीता, कृपांती व अन्य महिलाओं को भी सिलाई सिखाई। मिथलेश सहित कई महिलाओं को परचूनी दुकान व अन्य रोजगारों से जोड़ा।
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बड़ी बेटी दुर्गेश की पढ़ाई पूरी कराई तो डाक विभाग में ही नौकरी मिल गई। अन्य बच्चे भी पढ़ाई कर रहे। आंतरिक सामुदायिक रिसोर्स पर्सन के रूप में वह ब्लाक क्षेत्र की नौ ग्राम पंचायतों में महिलाओं को आजीविका मिशन से जोड़ चुकी हैं। नबावगंज व बढ़पुर में भी महिलाओं को जागरूक कर रही हैं। रीना देवी का कहना है कि महिलाओं के लिए आर्थिक सशक्तिकरण से ही सामाजिक मजबूती का रास्ता बनेगा।
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