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Farrukhabad News: फर्रुखाबाद में पानी में गेंहू उबालकर भूख मिटा रहे ग्रामीण

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फर्रुखाबाद। विगत दो माह से अधिक समय से बाढ़ का दंश झेल रहे ग्रामीणों पर भूख हावी होने लगी है। क्षेत्र में चारों ओर पानी ही पानी भरा हुआ है। बाढ़ का पानी चारों ओर भरे होने से ग्रामीणों के पास न तो खाने को राशन बचा है और न ही जलाने को इंधन। प्रशासन की ओर से भेजी जा रही राहत सामग्री भी कई स्थानों पर अब तक नहीं पहुंच पाई है। जिन स्थानों पर राहत सामग्री का वितरण किया भी गया है, वह ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा है।
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कंपिल के गांव बिहारीपुर के झाला पर रह रहे महेंद्र सिंह, वीरे, वीरेंद्र आदि ने बताया कि आने जाने के लिए कोई नाव की व्यवस्था भी नहीं है। राशन था वह खत्म हो गया। सरकारी राहत सामिग्री भी नहीं मिल पाई है। ऐसे में जैसे-तैसे जुगाड कर गेंहू में नमक डालकर उबाल रहे हैं। उससे ही परिवार का पेट भर रहा है। यह स्थिति विगत एक सप्ताह से है। इसके बावजूद प्रशासन का कोई भी नुमाइंदा सुध लेने के लिए गांव नहीं पहुंचा है।
नायब तहसीलदार मनीष वर्मा ने बताया कि मामला जानकारी में नहीं है, लेखपाल को भेजकर जानकारी करवाएंगे। राहत सामग्री का वितरण नहीं हो पाया है। डिमांड भेजी गई है। जल्द ही राशन वितरण कराया जाएगा।
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दोनों नदियों का जलस्तर घटा, समस्याएं बरकरार
संवाद न्यूज एजेंसी
अमृतपुर। गंगा के जलस्तर में शनिवार को 10 सेमी व रामगंगा में 35 सेमी की कमी आने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। कड़हर मार्ग पर पानी भरा होने से ग्रामीण ट्रैक्टर से आवागमन कर रहे हैं। दोनों नदियों का जलस्तर घटने के बावजूद बाढ़ पीड़ितों की समस्याएं बरकरार हैं।

गंगा का जलस्तर 10 सेमी कम होने से 137.15 मीटर पर आ गया है। जो अभी भी खतरे के निशान से पांच सेमी ऊपर है। नरौरा बांध से 75233 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जलस्तर कम होने के बावजूद बाढ़ पीड़ित ग्रामीण छतों से नीचे नहीं उतर पा रहे हैं। कुछ परिवार घर छोड़कर सड़क के किनारे रह रहे हैं। ग्रामीणों की समस्या अभी बरकरार है। एक ओर बाढ़ पीड़ितों को प्रशासन राहत सामग्री बंटवा रहा है। दूसरी ओर से कोटेदार से भी राशन मिल चुका है। खाना बनाने के लिए जगह व ईंधन न होने से खाना बनाने में भी दिक्कत है। सबसे बड़ी समस्या पशुओं के चारे की है। रामगंगा का जलस्तर 35 सेमी कम होने से खतरे के निशान से 20 सेमी नीचे 136.90 मीटर पर आ गया है। खो हरेली रामनगर बैराज से 10521 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
चाचूपुर से कड़हर जाने वाले मार्ग पर भरखा चौराहा, अर्जुनपुर के पास बाढ़ का पानी तेज धार से बह रहा है। चाचूपुर से भरखा तक कई जगह पानी सड़क पर होने से वाहन नहीं निकल पा रहे है। बाइक सवार निकालने का प्रयास करते हैं तो पानी में बाइक बंद हो रही है। गांव नगरिया, जिठौली, रामपुर, सलमेपुर, भुसेरा, दारापुर आदि गांव के रास्ते पर पानी आ जाने से रास्ता बंद हो गया है।


जिलाधिकारी ने बांटी राहत सामग्री
अमृतपुर। संपूर्ण समाधान दिवस में शिकायतें सुनने के बाद जिलाधिकारी डॉ.वीके सिंह ने बाढ़ग्रस्त गांव कुतुलूपुर, बुद्वा की मड़ैया में पहुंच कर ग्रामीणों से जानकारी ली। ग्रामीणों ने कहा कि बाढ़ आने से साल में एक फसल ही मिल पाती है। प्रधान अजीत सिंह ने बताया कि गांव के तीन मजरे बाढ़ से प्रभावित है, लेकिन अभी तक राहत सामग्री नहीं बंटी। तहसीलदार करमवीर सिंह को राहत सामग्री बांटने के निर्देश दिए। इसके बाद डीएम ने बाढ़ प्रभावित गांव इमादपुर सोमवंशी, जोगराजपुर, कंचनपुर सबलपुर, लायकपुर, अंबरपुर की मड़ैया, आशा की मड़ैया, पूर्वी गौंटिया से होते हुए बाढ़ का जायजा लिया। डीएम ने तहसीलदार से कहा बाढ़ से घिरे जिन गांव में एक बार भी राहत सामग्री नहीं पहुंची, उनमें प्राथमिकता से राहत सामग्री बांटी जाए। फसल का सर्वे कराया जाये। सीएमओ डॉ.अवनींद्र कुमार को बाढ़ प्रभावित गांवों में कैंप लगाकर दवा वितरण कराने के आदेश दिए। डीएम के आदेश पर तहसीलदार ने गांव बुद्वा की मड़ैया में 50 परिवारों को राहत सामग्री बांटी। (संवाद)


शिविर में 216 मरीजों का हुआ उपचार


अमृतपुर। संपूर्ण समाधान दिवस पर आने वाले फरियादियों के लिए सीएमओ के आदेश पर स्वास्थ्य शिविर लगाया गया। डाॅ. गौरव वर्मा बाढ़ प्रभावित गांव से आने वाले 216 मरीजों को देख कर दवा दी है। डाॅ. गौरव वर्मा ने बताया कि सर्वाधिक मरीज खुजली, जुकाम, बुखार से पीड़ित है। उनकी जांच भी की गई।
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बाढ़ का प्रभाव रजिस्ट्री कार्यालय पर
अमृतपुर। गंगा व रामगंगा में आई बाढ़ से 100 से अधिक गांव प्रभावित हैं। कई गांव के रास्तों में पानी भर जाने से बंद हैं। इससे ग्रामीण तहसील व जिला मुख्यालय नहीं पहुंच पा रहे हैं। इसके चलते शनिवार को रजिस्ट्री कार्यालय में दो ही रजिस्ट्री हुईं। सब रजिस्ट्रार रामदीन सिंह ने बताया कि अगस्त में 363 बैनामा हुए थे। जबकि सितंबर में अभी तक 197 बैनामा कराए गए। 18 सितंबर को 13, 19 को 10 व 20 सितंबर को 14 रजिस्ट्री हुई थी। बाढ़ का असर कार्यालय में भी दिख रहा है। (संवाद)



कायमगंज विधायक ने बांटी राहत सामग्री
कंपिल। क्षेत्र में बाढ़ का प्रकोप होने से ग्रामीण नाव से आवागमन कर रहे हैं। शनिवार दोपहर कायमगंज विधायक डॉ.सुरभि, उनके पति अजीत गंगवार, एसडीएम रविंद्र कुमार, नायब तहसीलदार मनीष वर्मा गांव नुनेहरा के निकट इकलहरा मार्ग पर पहुंचे। गांव हमीरपुर मजरा जात के चारों ओर बाढ़ का पानी भरा होने से सड़क पर लगे टेंट में 80 परिवारों को राहत सामग्री के पैकेट वितरित किए। बाढ़ग्रस्त गांव इकलहरा से विधायक का काफ़िला निकल गया। वहां बाढ़ पीड़ित राहत सामग्री के इंतजार में बैठे रहे। इन ग्रामीणों को अभी तक कोई मदद नहीं मिली है। (संवाद)
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काली नदी ने भी बढ़ाई मुसीबत, घरों में पानी

कमालगंज। मुजफ्फरनगर से निकलकर जिले की कन्नौज सीमा के पास गंगा में मिलने वाली काली नदी के पानी ने भी मुसीबत बढ़ा दी है। काली नदी के आसपास स्थित गांवों में पानी भरने से फसलें चौपट हो रहीं। कदुआपुर गांव के घरों में काली की बाढ़ का पानी पहुंच गया। गंगा की सहायक नदी के रूप में जानी जाने वाली 300 किलोमीटर लंबी काली नदी जिले से होकर खुदागंज के आगे गंगा में मिलती है। क्षेत्र की ग्राम पंचायत दरौरा, गगनी, खुदागंज के कई मजरों में पानी पहुंच गया। खुदागंज सिद्धगुफा आश्रम के आसपास पानी भरा है। ग्रामीणों का कहना है कि काली नदी के पानी से फसलों का काफी नुकसान हुआ। गगनी के ग्राम प्रधान गंगाराम ने बताया कि कदुआपुर में नीचे की ओर स्थित घरों में पानी से समस्या है। (संवाद)
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चाचूपुर पुलिया पर दाह संस्कार, दूसरी नाव लगी

कमालगंज। बाढ़ के कारण गंगा गली के आगे चाचूपुर पुलिया के पास दाह संस्कार हो रहे हैं। वहीं चाचूपुर गांव का रास्ता पूरी तरह बंद होने से गांव में रह रहे लोगों के आने-जाने के लिए दूसरी नाव लगाई गई। चाचूपुर गांव का मंदिर व पास में स्थित पिन्ना वाले मंदिर में जाने का रास्ता पानी के कारण बंद हो गया। आशाराम, रामबरन, अमरसिंह, मलखान कठेरिया के घरों के अंदर बाढ़ का पानी भरा है। कई किसानों की मक्का व धान की फसल में चार फिट तक पानी भरा है। ग्राम प्रधान का कहना है कि दूसरी नाव आ जाने से बाढ़ पीड़ितों को राहत मिली है। नाव से ही वह गांव से निकल पा रहे हैं। वहीं जंजाली नगला में भी बाढ़ का पानी लोगों के लिए मुसीबत बना है।
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