संवाद न्यूज एजेंसी
फर्रुखाबाद। सीएमओ कार्यालय के सरकारी वाहनों की मरम्मत करने वाली गैराज से कमीशन के खेल में काम छिन गया है। एंबेस्डर की मरम्मत में 20 प्रतिशत कमीशन के अलावा चालक को 10 हजार रुपये न देने पर बात बिगड़ गई। इससे अब गैराज मालिक का भुगतान भी फंस गया है।
सीएमओ कार्यालय में शासकीय वाहनों की मनमाने तरीके से मरम्मत कराई जाती है। मात्र एक शासकीय एंबुलेंस कई माह से सीएमओ कार्यालय परिसर में खड़ी है जबकि वर्षों पुरानी रिजेक्ट की हुई एंबेस्डर को 60 हजार रुपये खर्च कर चार माह पूर्व ठीक कराया गया था। अब वह एंबेस्डर कहां है, इसका पता नहीं है। फिलहाल कितने शासकीय वाहन हैं और किस स्थिति में हैं, इसकी जानकारी तो पटल प्रभारी सुधाकर वर्मा भी नहीं दे सके।
पूछने पर बताया कि चालकों को नोटिस जारी कर वाहनों की स्थिति मांगी गई है। इधर गैराज मालिक रोशन लाल ने एक एसीएमओ को बताया कि वह वाहनों की मरम्मत पर 20 प्रतिशत कमीशन देते थे। एंबेस्डर मरम्मत में 60 हजार रुपये का पक्का बिल देकर 20 फीसद कमीशन भी दिया। चालक ने 10 हजार रुपये अतिरिक्त मांगे। इतनी बचत न होने से उसने रुपये देने से मना कर दिया। इसके बाद से काम बंद कर दिया गया।
कुछ वाहनों की मरम्मत का भुगतान भी बकाया है। इसका अभी वर्कआर्डर भी नहीं मिला। करीब 20 वर्ष से अधिक समय से वह काम कर रहा था। सीएमओ डॉ.अवनींद्र कुमार ने बताया कि वाहनों की सही मरम्मत न करने पर गैराज से काम कराना बंद कर दिया है। 20 प्रतिशत कमीशन लेने का आरोप गलत है। 10 हजार रुपये मांगे जाने के संबंध में चालक हरेंद्र वर्मा से पूछताछ करेंगे। हालांकि चालक की कुछ अन्य शिकायतें भी उन्हें मिली हैं। आरोप सही पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।