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कायमगंज चीनी मिल की क्षमता बढ़ने की जगी उम्मीद

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कायमगंज। प्रदेश सरकार के बजट से जिले की 47 साल पुरानी सहकारी चीनी मिल के भी दिन बहुरने की आस जगी है। बजट में प्रदेश की चीनी मिलों के नवीनीकरण एवं आधुनिकीकरण व नई चीनी मिलों की स्थापना के लिए 380 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।
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गन्ना किसानों का कहना है कि यहां की चीनी मिल की क्षमता बढ़ाने की मांग हर चुनाव में उठी, मगर जीत की खुशी में हमेशा जनप्रतिनिधि इसे भूलते रहे। सरकार ने बजट में चीनी मिल के लिए बजट का प्रावधान करके एक सराहनीय कदम उठाया है।
कायमगंज की सहकारी चीनी मिल का नौ जनवरी 1974 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने शिलान्यास किया था। इसके बाद 10 नवंबर 1975 को तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा ने इसका शुभारंभ किया था। जब चीनी मिल चालू हुई तो गन्ना विभाग ने किसानों को बीज उपलब्ध कराया।
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अन्य फसलों के मुकाबले ज्यादा फायदा होने से धीरे-धीरे गन्ना किसान बढ़ते चले गए। जब चीनी मिल लगाई गई तब 12,500 क्विंटल दैनिक पेराई क्षमता के अनुरूप ही किसान गन्ना उगाते थे।
गन्ना किसान बढ़ते गए, मगर मिल की क्षमता वृद्धि नहीं हुई। अब तो जर्जर मशीनों की वजह से मिल को हर साल करोड़ों का घाटा भी उठाना पड़ता है। पिछले सत्र में 8,564 किसानों ने 5,118 हेक्टेयर भूमि पर गन्ने की खेती करके 33 लाख 26 हजार 700 क्विंटल गन्ने की पैदावार की।
जर्जर चीनी मिल से 14 लाख 16 हजार क्विंटल गन्ने की पेराई हुई। इससे एक लाख 40 हजार क्विंटल चीनी बनी। हमेशा की तरह इस साल भी मिल को घाटा झेलना पड़ा। 19 लाख 10 हजार 700 क्विंटल गन्ना किसानों को कोल्हू क्रशर पर औने-पौने दामों पर बेचना पड़ा।
प्रदेश सरकार ने गुरुवार को पेश किए गए बजट में चीनी मिलों के आधुनिकीकरण और नई चीनी मिल की स्थापना के लिए 380 करोड़ के बजट का प्रावधान किया तो किसानों में इस मिल की क्षमता वृद्धि की उम्मीद जगी है। जीएम किशनलाल ने बताया कि उनके पास अभी कोई सूचना नहीं है।
जब बजट इससे जुड़ी घोषणा हुई है तो उम्मीद की जा सकती है कि यहां की मिल की भी क्षमता वृद्धि हो। क्षमता बढ़ने से निश्चित ही मिल घाटे से उबरेगी और क्षेत्र के किसानों को भी लाभ मिलेगा।
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