अमृतपुर। गंगा का जलस्तर खतरे निशान से 15 सेंटीमीटर ऊपर बह रहा है। बाढ़ से प्रभावित गांव में बीमारी फैलने लगी है। दवा का वितरण स्वास्थ्य टीम द्वारा कागजों में ही दिखाई दे रही है। प्रशासन द्वारा मिली खाद्य सामग्री भी खत्म होने लगी है।
नरौरा बांध से गंगा में लगातार पानी छोड़े जाने से गंगा का जलस्तर खतरे के निशान 137.10 मीटर से 15 सेमी. ऊपर है। रविवार को गंगा का जलस्तर 137.25 मीटर पर स्थिर रहा। नरौरा बांध से गंगा में एक लाख 9910 क्यूसेक पानी और छोड़ा गया है। क्षेत्र में बाढ़ का पानी घरों से अभी पूरा निकल भी नहीं पाया था और फिर भर गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि गंगा में आई बाढ़ के कहर से मुसीबत बढ़ती जा रही है। गन्ना, धान, मूंगफली की फसल नष्ट हो गई हैं। आने-जाने के लिए रास्ते भी बंद हैं। पानी कम न होने से समस्या बढ़ती जा रही है। बड़े परिवार वालों को जो राहत सामग्री मिली थी वह खत्म हो चुकी है। घर में राशन न होने से बच्चों की भूख मिटाना चुनौती है। गांव अंबरपुर की मड़ैया की चंपा देवी, उर्मिला, शांती, रंजना, मीना का कहना है कि तहसील प्रशासन द्वारा मिली राहत सामग्री खत्म हो चुकी है।
परिवार में आठ से नौ सदस्य होने से राशन जल्दी खत्म हो गया। घरों में पानी भरा होने से रहने किए जगह नहीं बची है। ग्रामीण सड़क के किनारे खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।
गांव में फैल रही बीमारी, नहीं पहुंचीं स्वास्थ्य टीमें
- गांव में बाढ़ का पानी भरा होने से बीमारी फैलने लगी है। गांव तीसराम की मड़ैया के निवासी बृजेश, लीला, देशराज, उमेश चंद्र, दिनेश, ऊषा, अंतिमा, दिव्या, गांव उदयपुर के फकीरेलाल, सूरजपाल, आदित्य, सुनील, मोनू, जसवंत, उदयपाल, हरसिंहपुर कायस्थ के विजयपाल, आशाराम लक्ष्मी देवी, रामकली, सुशीला , मानसिंह, ऊगरपुर, सुंदरपुर, नगला दुर्गु, सैदापुर, कछुआ गाढ़ा, सवितापुर, राजाराम की मड़ैया, जसूपुर गढ़िया, पट्टी भरखा, मंझा मड़ैया, कुड़रा, फुलहा, जटपुरा, माखन नगला, करनपुर घाट आदि गांव में बुखार, दाद खाज खुजली, आखों की बीमारी फैली हुई है। स्वास्थ्य विभाग के कागजों में चल रही रैपिड रिस्पांस टीम बाढ़ प्रभावित गांवों में नहीं जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि झोलाछाप से दवा लेने के लिए मजबूर हैं। ज्यादा बीमार होने पर नाव से दवा लेने के लिए जाना पड़ रहा है। क्लोरीन की गोली न बांटे जाने से ग्रामीण प्रदूषित पानी पीने को मजबूर हैं।
बदायूं मार्ग पर बाढ़ पीड़ित सुखा रहे मक्का
खेतो में बाढ़ का पानी भर जाने से मक्का की फसल खराब होने लगी थी। किसानों ने नाव लगाकर भुट्टा तोड़ रहे हैं और सड़क के किनारे डालकर सुखा रहे हैं। किसानों का कहना है कि बाढ़ का पानी घरों में भरा हुआ है। घर तक जाने के लिए रास्ते में पानी भरा है। इससे सड़क पर मक्का सुखा रहे हैं।
पशु मेला में भरा पानी
मोहद्दीपुर में रविवार को पशु मेला लगता है। बाढ़ का पानी पशु मेला की जगह में भर गया। किसान अपने पशु बिक्री के लिए लेकर आए, लेकिन पानी भरा होने से बंदायू मार्ग के किनारे लेकर पशु लेकर खड़े हुए। वहीं पशुओं की बिक्री भी हुई।