कमालगंज। ट्रैक पर मरम्मत होने की वजह से पैसेंजर को 30 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से गुजारने का कॉशन दिया गया था, लेकिन चालक ने सतर्कता दिखाते हुए 15 किलोमीटर स्पीड से ही ट्रेन चलाई।
यदि ट्रेन 30 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चल रही होती तो कई बोगियां बेपटरी हो सकती थीं। इससे हादसा भी बड़ा हो सकता था।
रजीपुर-खुदागंज स्टेशनों के बीच दो स्थानों पर रेल लाइन की मरम्मत का काम शुक्रवार सुबह चल रहा था। खुदागंज रेलवे स्टेशन से एक किलोमीटर पहले गुमटी संख्या-128 सी के पास सीनियर सेक्शन इंजीनियर शैलेंद्र कुमार सिंह काम करा रहे थे। उन्होंने 30 किलोमीटर की गति से ट्रेन गुजारने का कॉशन लिया था।
फर्रुखाबाद-कानपुर पैसेंजर ट्रेन संख्या-04134 कॉशन पर 15 किलोमीटर की गति से ही चल रही थी। मरम्मत की जा रही पटरी से ट्रेन का इंजन तो निकल गया था, लेकिन बाद में लगे डिब्बे के आगे वाले दोनों ओर के पहिये पटरी से उतर गए। इस डिब्बे में आगे व पीछे की ओर लगेज था और बीच में दिव्यांगजन बैठे थे।
पहिये उतरने के बाद जब अधिकारी व कर्मचारी मौके पर पहुंचे तो गार्ड अरुण बाबू ने उन्हें जानकारी दी कि चालक ने पूरी सतर्कता बरती।
एक तो उसने कॉशन में मिली गति सीमा से आधी गति से ट्रेन चलाई। इसके साथ ही झटके लगते ही इमरजेंसी ब्रेक लगाकर वहीं ट्रेन रोक दी। अन्यथा पीछे के और डिब्बे पटरी से उतर सकते थे या एक-दूसरे से भिड़ सकते थे।
ट्रैक से पैसेंजर ट्रेन के पहिये उतरने के बाद भीड़ में मौजूद कतरौली पट्टी गांव निवासी एक प्रत्यक्षदर्शी ने लोगों को बताया कि वह खेत में लाइन के दूसरी ओर से वापस घर जा रहा था।
ट्रेन आने की बात जानकर वह लाइन के पास पहुंचा। जिस स्थान पर मरम्मत हो रही थी, वहां एक ओर प्लेट कस गई थी।
इसी बीच ट्रेन दिखाई पड़ने पर एक कर्मचारी ने मौजूद अधिकारी से कहा कि काम पूरा नहीं हो पाया ट्रेन रुकवा दें।
अधिकारी ने कहा कि रुकवाने की जरूरत नहीं है। कम गति में ट्रेन निकल जाएगी। कर्मचारियों की बात न मानने पर हादसा हो गया।