संवाद न्यूज एजेंसी
फर्रुखाबाद/अमृतपुर। गंगा में नरौरा बैराज से पानी छोड़ने की मात्रा भले ही कम होती जा रही हो, मगर जलस्तर स्थिर बना हुआ है। गांवों में जलभराव होने की वजह से दुश्वारियां कम नहीं हो रहीं। सदर तहसील के 10, अमृतपुर 100 समेत करीब 150 गांव बाढ़ प्रभावित हैं। इनमें खाने-पीने के सामान की दिक्कत है। बिजली आपूर्ति बंद होने की वजह से सबसे बड़ी दिक्कत रोशनी की है।
गंगा का जलस्तर दूसरे दिन मंगलवार को भी 137.25 मीटर पर स्थिर है जबकि नरौरा बांध से मात्र 91,851 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे जलस्तर में कमी आने की उम्मीद बंधी है। सदर, अमृतपुर व कायमगंज तहसील क्षेत्र के करीब 150 गांवों में भरा बाढ़ का पानी बमुश्किल पांच सेंटिमीटर कम हुआ है। फिलहाल दुश्वारियों में कोई कमी नहीं आई है। पांचाल घाट पर गंगा खतरे के निशान से 15 सेंटिमीटर ऊपर बह रही हैं। हरसिंहपुर कायस्थ के घरों और रास्ते जलमग्न हैं। बीमार लोगों को नावों से जिला मुख्यालय लाने में पसीने छूट रहे हैं।
गांव में अभी तक न तो कोई अधिकारी पहुंचा और न कर्मचारी। किसी तरह की सहायता भी नहीं की गई। रामगंगा के जलस्तर पांच सेमी घटकर 135.30 मीटर पर आ गया है। कोलासोता, हरपालपुर, सिकंदरपुर, अलादापुर भटौली, आदि गांव के पास किसानों की ज़मीन कटने लगी लगी हैं।
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डीएम की बांटी राहत सामग्री में निकले सड़े आलू
-चिन्हित 295 लोगों को बांटी गई राहत सामग्री, हजारों को अभी भी इंतजार
तहसील क्षेत्र के करीब 100 गांवों में पानी भरने से हजारों लोग बाढ़ से परेशान हैं। मंगलवार को जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह ने 295 लोगों को राहत सामग्री के पैकेट भेंट किए। जिम्मेदारों की लापरवाही की वजह से इनमें सड़े आलू निकलने से लोगों ने आक्रोश व्यक्त किया। अभी भी हजारों लोगों को राहत सामग्री का इंतजार है। राहत सामग्री पहुंचाने में प्रशासन काफी सुस्त नजर आ रहा है।
मंगलवार को कंचनपुर सबलपुर, कुड़री सारंगपुर, अंबरपुर, मंझा, अंबरपुर की मढ़ैया, फकरपुर, रामपुर, जोगराजपुर में राहत सामग्री वितरित की गई। डीएम संजय कुमार सिंह ने गांव रामपुर, जोगराजपुर में करीब 295 लोगों को सामग्री वितरित की। डीएम ने एसडीएम से कहा कि कोई भी बाढ़ से पीड़ित राहत सामग्री से वंचित न रहे। हर बाढ़ पीड़ित तक सहायता पहुंचनी चाहिए। उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि गहरे पानी में जाने की जरूरत नहीं है। सभी लोग बच्चों का विशेष ख्याल रखें। नाव में अधिक सामान न लादें। एक बार की जगह दो बार में राशन लेकर जाए। राहत सामग्री में बाढ़ पीड़ितों को 10-10 किलो आलू भी दिए जा रहे हैं।
वितरण के बाद बाढ़ पीड़ितों ने आलू देखे, तो उनमें बदबू आ रही थी। पैकट खोलने पर आलू सड़े निकले। इससे लोगों में असंतोष नजर आया। तहसीलदार कर्मवीर सिंह ने बताया कि आलू के पैकेट सड़े होंगे, तो उसे वापस करा दिया जाएगा। इस दौरान एडीएम सुभाष चन्द्र प्रजापति, जिला पंचायत अध्यक्ष मोनिका यादव, एसडीएम रवींद्र कुमार, तहसीलदार कर्मवीर सिंह, ग्राम प्रधान पति सुधीर गुप्ता आदि रहे।
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चित्रकूट डिप पर दो की जान जाने के बाद चेती पुलिस
अमृतपुर। बदायूं-फर्रुखाबाद मार्ग पर चित्रकूट गांव के पास बनी डिप पर दो युवकों के डूबने के बाद पुलिस की नींद खुल सकी। अब दोनों ओर लगी पुलिस आने वाले वाहनों को रोक कर वापस दूसरे रास्ते से गंतव्य तक भेज रही है।बदायूं मार्ग चित्रकूट डिप पर तीन फीट से अधिक ऊंची पानी की धार बह रही है। इससे छोटे वाहनों का आवागमन पूरी तरह से बंद कर दिया गया। तेज बहाव के बावजूद सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस बल तैनात नहीं किया गया। यही वजह रही कि सोमवार को पंकज व अजय की डूबने से मौत हो गई थी।
इसके बाद पुलिस प्रशासन की नींद खुली। डिप के दोनों ओर वाहनों को रोकने के लिए पुलिस लगा दी गई। आने-जाने वाहन चालकों को रोक कर दूसरे रास्ते से भेजा जाता रहा। ग्रामीणों ने बताया कि पहले से ही पुलिस लगाई गई होती तो दो लोगों की जान बचाई जा सकती थी। जबकि एसडीएम ने राजेपुर थाना पुलिस को पत्र लिखकर सुरक्षा कर्मी लगाने के निर्देश दिए थे।
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स्वास्थ्य कैंप बने मजाक, बाढ़ पीड़ितों के स्वास्थ्य से खिलवाड़
भुड़रा गांव में सरह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के वार्डब्वॉय ने बांटी दवाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
अमृतपुर। स्वास्थ्य विभाग बाढ़ पीड़ित ग्रामीणों के साथ मजाक कर रहा है। बाढ़ ग्रस्त गांवों में लगने वाले स्वास्थ्य कैंप मजाक बन गए हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सरह की ओर से भुड़रा गांव में लगाए गए स्वास्थ्य कैंप में वार्डब्वॉय दवाएं बांटता रहा। इसका वीडियो वायरल होने के बाद विभाग के अधिकारी सकते में आ गए।
बाढ़ प्रभावित गांवों में सड़ांध शुरू होने से लोगों में बीमारी फैलने लगी है। इसी के चलते डीएम के आदेश पर सीएमओ अवनींद्र कुमार ने गांवों में स्वास्थ्य कैंप लगाने के आदेश दिए थे। इन्हीं आदेशों के अनुपालन में सरह क्षेत्र में डॉ. सिद्धार्थ श्रीवास्तव व फार्मेसिस्ट अरविन्द कुमार को लगाया गया है। इसके बाद भी डॉक्टर व फार्मासिस्ट गायब रहते हैं। भुड़रा गांव में लगे कैंप में वार्डब्वॉय वीरपाल तिवारी ने ग्रामीणों के सहयोग से दवाएं बांटी। इससे साफ है कि स्वास्थ्य विभाग चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से दवा वितरण कराकर ग्रामीणों के जीवन से खिलवाड़ कर रहा है।
ग्रामीण क्षेत्र के लोगों का कहना है कि डॉक्टर व फार्मेसिस्ट अस्पताल नहीं आते हैं। यही नहीं दैवीय आपादा में भी उन्होंने गांव में आने की जरूरत नहीं समझी। सीएमओ अवनींद्र कुमार ने बताया कि जिसकी ड्यूटी जहां लगी है, वह अपनी ड्यूटी करेगा। लापरवाही करने वाले के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।