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Farrukhabad News: 25 फीसदी चिकित्सकों के भरोसे जिले की सेहत, विशेषज्ञ भी नहीं

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संवाद न्यूज एजेंसी
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फर्रुखाबाद। जनपद में 25 फीसदी चिकित्सकों के भरोसे स्वास्थ्य सेवाएं चल रही हैं। शासन के आदेश के बावजूद एसीएमओ व डिप्टी सीएमओ ओपीडी में मरीज नहीं देख रहे हैं। अधिकांश प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बिना चिकित्सकों के हैं। इन्हे फार्मासिस्ट चला रहे हैं।

जनपद में सीएमओ के अधिकार क्षेत्र में सिविल अस्पताल लिंजीगंज सहित नौ सीएचसी व 32 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। सीएमओ सहित 130 डॉक्टरों के पद जिले में स्वीकृत हैं। इसके सापेक्ष जिले में मात्र 42 डॉक्टरों की तैनाती है। इनमें सीएमओ के अलावा पांच एसीएमओ व तीन डिप्टी सीएमओ प्रशासनिक व्यवस्था में व्यस्त रहते हैं।
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10 सीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारियों का अधिकांश समय विभाग की विभिन्न योजनाओं के संचालन में निकल जाता है। इससे नियमित तौर पर 23 डॉक्टर ही मरीजों की सेवा के लिए बचते हैं। यदि छह संविदा पर तैनात चिकित्सकों को भी जोड़ लें, तब भी कुल 29 डॉक्टर ही होते हैं। जो पदों के सापेेक्ष 25 फीसद भी नहीं हैं। ओपीडी में मरीज देखने वाले यह डॉक्टर विशेषज्ञ डिग्री धारक नहीं है।
फिजिशियन व ईएनटी सर्जन नहीं
खास बात तो यह है कि स्वास्थ्य विभाग के पास न तो फिजीशियन है और न ही सर्जन। ईएनटी सर्जन की तो तीन वर्षों से तैनाती न हाेने से मरीजों को कोई उपचार नहीं मिल पा रहा है। मरीजाें को प्राइवेट चिकित्सकों के अस्पतालों में जाकर अपनी जेबें ढीली करने को मजबूर होना पड़ रहा है। नाक-कान-गला की जांच संबंधी दिव्यांग प्रमाणपत्र भी नहीं बन पा रहे हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए भी डॉक्टर पूरे न होने से अधिकांश प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बिना डॉक्टर के फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहे हैं।
जिला अस्पताल 40 की जगह मात्र 17 डॉक्टर
जिला अस्पताल में लोहिया अस्पताल पुरुष व महिला में डॉक्टरों के कुल 40 पद सृजित हैं। इनमें दो सीएमएस भी शामिल हैं। इसके सापेक्ष मात्र 17 डॉक्टरों की तैनाती है। इनमें भी एक डॉक्टर संविदा पर तैनात है। यहां भी न तो फिजीशियन की तैनाती है और न ही सर्जन की। इस समय प्रतिदिन ओपीडी में औसतन 1000 मरीज पहुंच रहे हैं। इससे ओपीडी में बैठने वाले डॉक्टरों के कक्ष में मरीजों की भीड़ लगी रहती है।
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क्या कहते हैं जिम्मेदार
सीएमओ डॉ.अवनींद्र कुमार ने बताया कि जिले में डॉक्टरों की कमी से स्वास्थ्य सेवाएं चलाना चुनौती बना है। शासन को डॉक्टरों की कमी के संबंध में लगातार पत्राचार किया जा रहा है।
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