कायमगंज। चकरोड की पैमाइश कराने के लिए रिश्वत लेते पकड़े गए लेखपाल के अस्थाई दफ्तर के दो माह से किसान चक्कर लगा रहा था। लेखपाल ने घूस लेने के चक्कर में जिलाधिकारी के आदेश को भी दरकिनार कर दिया। इसके बाद किसान ने पूर्व प्रधान की मदद से फंसाने की योजना बनाई। पीड़ित ने कई बार लेखपाल से रुपये न होने का दुखड़ा सुनाया था। परेशान होकर उसने कठोर कदम उठाया।
शुक्रवार को पुल गालिब तिराहे के पास ढाबे में लेखपाल रामनरेश जाटव को गांव कुरार निवासी किसान नेत्रपाल सिंह से 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए एंटी करप्शन टीम ने पकड़ लिया था। लेखपाल के बारे में आम चर्चा है कि 20 रुपये में जारी होने वाले इंतखाब के भी 200 रुपये लेते थे। साथ ही लेखपाल ने नवाबगंज में नेहरू इंटर कालेज के सामने अस्थाई दफ्तर बना रखा है। वहां उनके सहायक बैठकर लोगों से काम के लिए उगाही करते हैं। नेत्रपाल चकरोड की पैमाइश के लिए लेखपाल से दो माह से चक्कर लगा रहे थे। जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो उन्होंने 18 अक्तूबर को जिलाधिकारी को प्रार्थनापत्र दिया। जिलाधिकारी के आदेश को दरकिनार करते हुए 20 हजार रुपये की मांग कर डाली। किसान ने कई बार रुपये न होने का दुखड़ा सुनाया, मगर वह किसी कीमत पर राजी नहीं हुआ। 10 हजार रुपये में बात तय हो गई। तभी नेत्रपाल ने एक पूर्व प्रधान से मिलकर रुपये की व्यवस्था कर लेखपाल को सबक सिखाने की योजना बना डाली।
तहसील में पहले भी रिश्वत लेने के वीडियो हो चुके वायरल
कायमगंज। एक वर्ष पूर्व तहसील के एक कर्मचारी ने किसान से उसके काम के 45 हजार रुपये मांगे थे। इसका किसान ने वीडियो वायरल कर दिया। वायरल वीडियो का समाचार प्रकाशित होने पर संबंधित कर्मचारी को निलंबित कर दिया गया था। इसके अलावा महिला कर्मचारी का भी वीडियो वायरल हो चुका है। इसके बाद तहसील में हर पटल पर कैमरे भी लगाए गए, लेकिन यह कुछ दिन चले इसके बाद फिर सब कुछ पहले जैसा ही हो गया।