फर्रुखाबाद। डॉ. राममनोहर लोहिया पुरुष अस्पताल की इमरजेंसी में भले ही वार्ड बॉय की तैनाती मरीजों की सेवा के लिए रहती हो, मगर वह कुर्सी और बेंचों पर बैठकर आराम फरमाते हैं। मरीजों का इलाज कराने पहुंचे तीमारदारों को खुद ही स्ट्रेचर खींचना मजबूरी है। यही नहीं तीमारदारों को फटकार भी सहनी पड़ती है।
मऊदरवाजा थाने के गांव रामपुर ढपरपुर निवासी शिवकुमार के पिता वेदराम (68) काफी दिनों से उल्टी और पेट दर्द और उनकी मां फूल चमेली (60) पूरे पैर में दर्द से परेशान हैं। शिवकुमार अपने चचेरे भाई रविंद्र के साथ ई-रिक्शा से माता-पिता को लेकर सोमवार शाम करीब पौने चार बजे अस्पताल पहुंचे। उन्हें बाहर स्ट्रेचर नहीं मिला। वह अंदर से स्ट्रेचर ले गए। अंदर ड्यूटी पर तैनात एक अस्पताल कर्मी ने वार्ड बॉय से मरीज को अंदर लाने में मदद करने के लिए कहा।
वार्ड बॉय ने बाहर निकलते ही तीमारदार से कहा कि स्ट्रेचर लेकर जाओ और मरीज को ले आओ। इसके बाद शिवकुमार पहले पिता को इमरजेंसी में छोड़ गया, फिर मां को दूसरी स्ट्रेचर से लाया। इस दौरान पिता स्ट्रेचर पर ही लेटे रहे। शिवकुमार ने बताया कि पहली बार स्ट्रेचर चलाया है। वह कई बार चढ़ाते समय उठाने के प्रयास में नीचे निकल गया। इससे काफी दिक्कत हुई। सीएमएस डॉ. राजकुमार गुप्त ने बताया कि वार्ड बॉय मरीजों की सहायता करने के लिए हैं। यदि वह लापरवाही करते हैं, तो वह जानकारी लेकर जांच के बाद कार्रवाई करेंगे।