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Farrukhabad News: श्लोक किए गए कम ताकि संस्कृत की पढ़ाई में लगे मन

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संवाद न्यूज एजेंसी
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फर्रूखाबाद। संस्कृत विषय को रूचिकर बनाने तथा बच्चों का रुझान बढ़ाने के लिए यूपी बोर्ड की किताबों में बदलाव किया गया है। बोर्ड ने वर्तमान शैक्षिक सत्र के लिए विशेषज्ञों की सहायता से संस्कृत की किताबों को नए सिरे से तैयार करवाया है। यह किताबें राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत तैयार कराई गईं हैं। हाईस्कूल संस्कृत में गद्य, पद्य, नाटक और व्याकरण चार भाग हैं। जिनमें से गद्य और पद्य के बोझिल और बड़े पाठ के अंश को कम किया गया है।
कक्षा नौ की पद्य पीयूषम के पहले पाठ रामस्य पितृभक्ति में पहले 26 श्लोक हुआ करते थे। जिसे अब कम करके 14 कर दिया गया है। दूसरे पाठ सुभाषितानि में पहले 15 श्लोक थे, जो अब घटकर 10 रह गए हैं। तीसरे पाठ सूक्ति सुधा में नौ श्लोक को कम करके सात कर दिया गया है। कक्षा दस की पद्य पीयूषम के पहले पाठ लक्ष्य वेध परीक्षा में पहले 21 श्लोक थे जोकि घटकर 14 रह गए हैं। इसी प्रकार अन्य पाठ और गद्य में भी काफी हिस्से को कम किया गया है।
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जिला विद्यालय निरीक्षक नरेंद्र पाल सिंह ने बताया कि बोर्ड की ओर से विशेषज्ञों की देखरेख में अनावश्यक और कठिन हिस्सों को हटाया गया है। संभवत: यह कार्य इसलिए किया गया है, जिससे अधिक से अधिक बच्चों का रुझान संस्कृत विषय की ओर हो सके।
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पहली बार बोर्ड ने छपवाई किताबें
बोर्ड ने पहली बार हिन्दी, संस्कृत और उर्दू की किताबों को प्रकाशित करवाया है। पिछले साल तक इन तीनों विषयों का पाठ्यक्रम बोर्ड निर्धारित करता था, लेकिन किताबों के प्रकाशन पर नियंत्रण नहीं था। कोई भी प्रकाशक इन्हें छाप सकता था। निजी प्रकाशक कभी-कभी गलत तथ्यों को प्रकाशित कर देते थे। इससे विद्यार्थियों को परीक्षा के दौरान काफी दिक्कत होती थी।
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