पुलवामा में शहीद हुए सीआरपीएफ के नायब सूबेदार विनोद कुमार पाल का इकलौता बेटा योगेंद्र उर्फ राजा भी सेना में भर्ती होकर आतंकियों से बदला लेगा। योगेंद्र ने कहा कि वह आतंकियों को चुन-चुन कर मारेगा। पिता के शहीद होने व मां की हालत देख दुखी बेटे को उसके चाचा ने ढांढस बंधाया।
गांव दत्तू नगला में मां का चेहरा देखकर शहीद के इकलौते बेटे योगेंद्र उर्फ राजा की हिम्मत टूटी तो पास खड़े रिश्ते के चाचा ने हिम्मत दी और कहा कि तुम्हें सेना में भर्ती होना है। मां की देखभाल के लिए परिवार काफी बड़ा है। इस पर राजा बोला कि आतंकियों को चुन-चुन कर मारेंगे। योगेंद्र उर्फ राजा शहीद नायब सूबेदार विनोद कुमार का इकलौता बेटा है। राजा सीडीएस की परीक्षा पास कर चुका है। अगस्त में इंटरव्यू होने वाला है। मां सुमन बीमार रहती हैं। मां का चेहरा देखकर वह बार-बार बिलख रहा था। मां को बिलखता देख वह हिम्मत हार गया। सेना में भर्ती होने के सवाल पर वह कहने लगा कि अब मां की देखभाल कौन करेगा।
एक बार बोला कि अब वह सेना में भर्ती नहीं होगा। पास खड़े रिश्ते के चाचा धर्मेंद्र पाल ने उसे गले से लगाया और कहा हिम्मत क्यों हार रहे हो। तुम्हें अब अपने पिता की शहादत का बदला लेना है। इस पर राजा बोला कि वह सेना में भर्ती होकर आतंकियों से मुठभेड़ कर अपने पिता की शहादत का बदला लेगा।
रो-रो कर बेसुध हुईं सुमन, बिगड़ी हालत
रविवार करीब दो बजे पुलवामा के गोंगू क्रासिंग पर चेकिंग के दौरान शहीद हुए विनोद कुमार पाल ने आखिरी बार अपने बेटे योगेंद्र व पत्नी सुमन से फोन पर बात की थी। बेटे को गांव में खेत में बोरिंग संबंधी काम बताया और पत्नी से हाल-चाल लेकर शाम को बात करने के लिए कहा। इसके बाद शाम को परिवार से बात करने का मौका ही नहीं मिला। परिजनों ने उनके घायल होने की जानकारी सुमन को दी, मगर शहादत की बात नहीं बताई थी।
सोमवार सुबह जब उन्हें पति के शहीद होने की जानकारी हुई तो उनके आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। वे बिलख-बिलख कर कह रहीं हैं कि शाम को बात करने के लिए कहा था, मगर दोबारा फोन नहीं आया। सुमन का 17 जून को ऑपरेशन हुआ था। वह खुद बीमार हैं। ऐसे में उनकी हालत और बिगड़ रही है। परिजन व रिश्तेदारों का आना-जाना लगा रहा। सभी लोग पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाते रहे।
शहीद के पिता ने की थी एमपी पुलिस में नौकरी
शहीद विनोद कुमार पाल के पिता जवाहर लाल अपने पिता के इकलौते पुत्र थे। उन्होंने 12 साल तक एमपी पुलिस में नौकरी की और फिर घर चले आए। उनके बड़े पुत्र सेवानिवृत्त सैनिक प्रमोद कुमार पाल ने बताया कि गांव में करीब 50 बीघा जमीन थी, जिसे कोई देखने वाला नहीं था। इससे वे नौकरी छोड़कर गांव आ गए थे। उनकी मां ध्रुववती व पिता भी गुजर चुके हैं। प्रमोद का बड़ा पुत्र मर्चेंट नेवी में है। परिवार में देश सेवा जज्बा है, इसलिए अधिकांश सेना में जाना पसंद करते हैं। गांव के छह लोग में भारतीय सेना में सेवा दे रहे हैं।