फर्रुखाबाद। राज्य सड़क परिवहन निगम के महाप्रबंधक की सख्ती के चलते डिपो के 13 चालक-परिचालकों का वेतन रोक दिया गया है। इनमें कुछ ने 5500 किलोमीटर के मानक से कम और कुछ ने शून्य किमी. बसें चलाईं। यह ऐसे चालक-परिचालक हैं, जोकि दफ्तरों में काम कर रहे हैं। इनमें कुछ ऐसे भी हैं जिन्हें समय से बसें न मिलने से लक्ष्य की प्राप्ति नहीं कर सके हैं। इससे त्योहार भी फीका रहा।
निगम के महाप्रबंधक ने एआरएम को पत्र भेजकर सभी कर्मचारियों से अपने मूल पद पर काम लेने के निर्देश दिए थे। उन्होंने चालक-परिचालकों से 5500 किमी. बस चलाने का लक्ष्य दिया था। यही नहीं चेकिंग के काम में अच्छी छवि के लोगों को लगाने की बात कही थी। डिपो में कई चालक-परिचालक सालों से दफ्तरों में काम कर रहे हैं। इन्हें कागजों में हटाकर खानापूरी कर ली गई। दफ्तरों में ही काम करते रहने से फरवरी माह का वेतन बनाकर भेजा गया। इसे जब पोर्टल पर अपलोड किया गया, तो डिपो के 13 कर्मियों का वेतन नहीं बनाया गया। इनमें अनुज दीक्षित, रेखा, अनुज कुमार, शैलेंद्र श्रीवास्तव, आमोद कुमार, नीरज गुप्ता, ब्रजगोपाल, अनिल कुमार, सुएफ अहमद, राजीव वर्मा व मनोज यादव समेत 13 शामिल हैं। होली के त्योहार पर भी वेतन न मिलने से घरों में मायूसी छाई रही।
बुकिंग क्लर्क कर रहे चेकिंग का काम
महाप्रबंधक ने पद के अनुरूप काम लेने और चेकिंग में अच्छी छवि के कर्मियों को लगाने के निर्देश दिए थे। इन आदेशों का जिम्मेदार पालन नहीं कर रहे हैं। डिपो में बुकिंग क्लर्क असित वैश्य और कासिम से चेकिंग का काम लिया जा रहा है। उनके साथ बस चालक पवन कटियार वाहन चला रहे हैं। जबकि डिपो में बुकिंग क्लर्क की कमी के चलते चालक-परिचालकों से काम कराया जा रहा है।
‘दफ्तर में लिपिकों की काफी कमी है। पटल को बंद नहीं किया जा सकता। उच्चाधिकारियों को वर्तमान हालातों से अवगत करा दिया गया है। शेष कर्मियों को जल्द वेतन मिलने की उम्मीद है।’
-आरसी यादव, एआरएम, फर्रुखाबाद डिपो।