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Farrukhabad News: चारा लेने को 10 किलाेमीटर की लगा रहे दौड़

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अमृतपुर। गंगा के जलस्तर में उतार-चढ़ाव जारी है। गंगा चेतावनी बिंदु से पांच सेमी नीचे बह रहीं हैं। गांव में भरा पानी जहां उतरने लगा है। इसके बावजूद ग्रामीणों की परेशानी कम होने की नाम नहीं ले रही हैं। खेत में खड़ी घास व फसल पानी में सड़ने से दुर्गंध उठ रही है। पशुओं के लिए चारे के लिए किसानों को पांच से 10 किलोमीटर की दौड़ लगानी पड़ रही है।
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गंगा में जलस्तर बढ़ना और घटना सावन माह में आम है। जुलाई माह से जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती इलाकों में जलभराव है। लगभग एक माह से ऊपर का समय होने के बाद भी अभी तक ग्रामीणों को निजात मिलते नहीं दिख रही है। गांव के बाहर सड़कों पर पानी भरा होने से जहां ग्रामीणों को आने-जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, पशुओं की बुरी स्थिति है। चारों ओर पानी भरा होने के कारण पशु खूंटे पर ही बंधे हैं।
कीचड़ और पानी में बैठने से पशुओं को काफी दिक्कत है। ग्रामीणों को उनके चारे की सबसे ज्यादा फिक्र है। गांव बरुआ, आशा की मड़ैया, सैदापुर, हरसिंहपुर कायस्थ, तीसाराम की मड़ैया, मंझा नगरिया जवाहर, बमियारी, अमिराबाद, नगला दुर्गु, को जाने वाले मार्ग पर पानी भरा होने के कारण ग्रामीणों को आने जाने में परेशानी हो रही है। खेतों में पानी भरा होने के कारण ग्रामीण अपने पशुओं को जीवित रखने के लिए चारा लेने के लिए गांव से पांच से 10 किलोमीटर दूर तक जाना पड़ रहा है।
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ग्रामीणों का कहना है कि सुबह छह बजे घर से निकल जाते हैं। शाम तीन से चार के बीच ही घर वापस आते हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पशुओं के लिए हरे चारे की व्यवस्था कराए जाने की मांग की। शुक्रवार को गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु से नीचे 136,55 मीटर पर स्थिर बना हुआ है। नरौरा बांध से गंगा में 77233 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। गंगा का जलस्तर कम होने के बाद तेज धार से कटान शुरू हो गया है। करनपुर घाट व उगरपुर में किसानों की जमीन कट रही है। खेतों से पानी निकलने के बाद अब सड़ने वाली घास, कूड़े की बदबू से जीना मुश्किल है। बाढ़ से घिरे गांव की बिजली चालू न होने से ग्रामीणों के उमस भरी गर्मी व अंधेरे में रात गुजारने को मजबूर हैं। रामगंगा 134.90 मीटर से घट कर 134.80 मीटर पर आ गया है। खो हरेली रामनगर बैराज से 5876 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
इनसेट

जेडी ने बाढ़ क्षेत्र में देखी दवा वितरण की जानकारी
स्वास्थ्य विभाग संयुक्त निदेशक गोपीनाथ मिश्र ने बाढ़ क्षेत्र दवा वितरण की हकीकत देखी। हालांकि वह खुद निर्माणाधीन पुलिया पर चल रहे पानी के कारण गांव तक नहीं पहुंच सके। शुक्रवार को संयुक्त निदेशक तहसील क्षेत्र के गांव मंझा के बाहर पहुंचे। रास्ते पर निर्माणाधीन पुलिया पर बाढ़ का पानी भरा होने के कारण वह गांव तक नहीं पहुंच सके। उन्होंने रास्ते से निकल रहे ग्रामीणों से बाढ़ के बारे में जानकारी ली। पूंछा कि स्वास्थ्य टीम दवा वितरण करने गांव आई या नहीं। ग्रामीणों ने बताया डाक्टर गौरव वर्मा गुरुवार को आए थे। आज भी दवा वितरण की है। गांव में खुजली व बुखार से लोग पीड़ित मिले। डाक्टर गौरव वर्मा ने बताया है कि रोस्टर के अनुसार गांव में दवा वितरण करने जा रहे हैं। किसी गांव में समस्या होने पर भी रोस्टर के बाद भी गांव में टीम के साथ जाते हैं।
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