फोटो- 16 एप से भेजी गई खबर) बसों की धुलाई, सफाई, सैनिटाइजेशन न होने पर जताया विरोध संविदा चालकों-परिचालकों ने छह मांगें उठाईं, यात्री परेशान संवाद न्यूज एजेंसी फर्रुखाबाद। शासन के निर्देश के बावजूद बसों की धुलाई, सफाई और सैनिटाइजेशन न होने तथा मानदेय में कटौती, रेस्ट न देने आदि छह मांगों के विरोध में पांच घंटे तक बसें नहीं निकालीं। गेट पर ही विरोध प्रदर्शन किया। कहा, न एआरएम फोन उठा रहे और न ही डिपो इंचार्ज। बिना सैनिटाइज बसों से उनमें संक्रमण का खतरा पैदा हो जाएगा। डिपो इंचार्ज के समझाने के बाद साढ़े 11 बजे संचालन शुरू हो सका। कोरोना संक्रमण से यात्रियों को बचाने के लिए बसें बिना सफाई, सैनिटाइज कार्यशाला से बाहर न निकलने के निर्देश हैं। लखनऊ की बस सुबह छह बजे निकलती है। इसके बाद अन्य आगरा, हरदोई, शाहजहांपुर, बरेली, कानपुर आदि रूटों की बसें जाती हैं। चालक-परिचालक जब अपने समय पर पहुंचे, तो वर्कशॉप में गाड़ियों में झाड़ू तक नहीं लगे थे। संविदा कर्मचारी यूनियन अध्यक्ष जयनरायन त्रिवेदी को लखनऊ बस लेकर जाना था। उन्होंने डिपो इंचार्ज गौरीशंकर और एआरएम को फोन किया, मगर रिसीव नहीं हुआ। इससे 12 से अधिक बसों के चालक-परिचालक एकत्रित हो गए और विरोध करने लगे। जमकर नारेबाजी की। कहा कि संविदा कर्मियों संग अन्याय है। मानदेय में कटौती की जा रही है। रेस्ट भी नहीं दिया जा रहा है। सुरक्षा के कोई साधन नहीं हैं। गाड़ियां सैनिटाइज तक नहीं होतीं। सैनिटाइजर की छोटी सी सीसी दी जाती और शाम को ले ली जाती है। अगले दिन मिलती तक नहीं है। मॉस्क भी ऐसे, जो काम तक नहीं करते। ऐसे में हम लोगों के जीवन को खतरा हो गया है। नौ बजे वर्कशाप कर्मचारी पहुंचे, तब धुलाई शुरू हुई। साढ़े 10 बजे डिपो इंचार्ज गौरीशंकर ने पहुंचकर संवादि चालक-परिचालकों से वार्ता की। उन्होंने समस्या का समाधान कराने का आश्वासन दिया। दोपहर 11 बजे के बाद ही गाड़ियों का निकलना शुरू हुआ। पांच घंटे तक बस स्टैंड पर यात्री भी परेशान रहे। यूनियन अध्यक्ष जयनरायन त्रिवेदी नेे बताया कि चालक-परिचालकों की दिक्कतों को समझा जाए। हरदोई तक ही भेजी गई लखनऊ की बस लखनऊ के लिए बस सुबह सात बजे बस स्टैंड से निकल जाती थी। मगर 12 बजे निकल सकी। लिहाजा उसे हरदोई तक ही भेजा गया। इससे लखनऊ जाने वाले यात्रियों को दिक्कत उठानी पड़ी। ‘बसों में देर से धुलाई शुरू हो सकी थी। इसलिए देरी हुई। वर्कशाप स्टाफ को निर्देश दे दिए हैं कि सुबह समय से बसों की धुलाई हो जाए। अन्य समस्या के समाधान को उच्चाधिकारी ही कुछ कर सकेंगे। बसें संचालित हो ही हैं।’ -गौरीशंकर, डिपो इंचार्ज।