संवाद न्यूज एजेंसी
फर्रुखाबाद/अमृतपुर। पहाड़ों पर हो रही बारिश का मैदानी इलाकों में फिर से कहर शुरू हो गया है। गंगा में जलस्तर स्थिर बना हुआ है जबकि रामगंगा 10 सेमी बढ़ी हैं। गंगा में 1.44 लाख क्यूसेक पानी छो़ड़े जाने से जलस्तर बढ़ने की आशंका सताने लगी है।
गुरुवार को गंगा में नरौरा बैराज से एक लाख 44,582 क्यूसेक पानी छोड़ना शुरू कर दिया गया। सुबह के वक्त पांचालघाट तट पर मीटर गेज 137.20 से बढ़कर 137.25 मीटर पर पहुंच गया, लेकिन शाम पांच बजे फिर से 137.20 मीटर पर ही जलस्तर आ गया। गंगा अभी भी खतरे के निशान से 10 सेमी ऊपर बह रही हैं। गंगा में फिर से छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा बढ़ने से बाढ़ पीड़ितों की धड़कनें तेज हो गई हैं। हरसिंहपुर कायस्थ के ग्राम प्रधान सुधीर, रामसच्चे, सुरेंद्र कुमार, राजेश आदि का कहना है कि बाढ़ का पानी जब से गांव में आया है। तब से सड़क किनारे खुले में रहने को मजबूर हैं।
करनपुर घाट, मंझा की मड़ैया, ऊगरपुर, रामपुर, जोगराजपुर, जटपुरा, रामप्रसाद नगला, कालिका नगला, कुड़री सारंगपुर आदि गांवों के लोगों के लिए नाव ही सहारा है। शहर के मोहल्ला कांशीराम कालोनी, सदर तहसील के गांव कटरी धर्मपुर, पंखियन की मड़ैया, अमिलापुर, बिलावलपुर, हैवतपुर गढि़या आदि गांव में भी बाढ़ का पानी भरा है।बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि परिवार और जानवरों का पेट भरना मुश्किल है। छतों, नावों, सड़कों के किनारे अंधेरी रात काटना कठिन है।
सांप, बिच्छू आदि जहरीले कीड़े-मकोड़े का भय रहता है। बच्चों की सुरक्षा करना चुनौती होती है। रामगंगा के जलस्तर में 135.30 मीटर से 10 सेंटीमीटर बढ़कर 135.40 मीटर पर पहुंच गया है। रामनगर से 1318 क्यूसेक पानी पास किया गया है। रामगंगा का जलस्तर बढ़ने से कटान ने तेजी पकड़ ली है। इससे कोला सोता, अलादपुर, भटौली के ग्रामीण कटान होने से भयभीत हैं।
बाढ़ पीड़ित प्रदूषित पानी पीने को मजबूर
फर्रुखाबाद। बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में हैंडपंप आदि पानी में डूबे हैं। इससे बाढ़ पीड़ितों को पीने के लिए शुद्ध पानी नहीं मिल पा रहा है। स्वास्थ्य विभाग से क्लोरीन की गोलियां भी नहीं बांटी गईं। इससे ग्रामीण प्रदूषित पानी पीने को मजबूर हैं। बताया जा रहा है कि स्वास्थ्य विभाग में दो लाख क्लोरीन की गोली खरीदी गई हैं। सीएचसी राजेपुर के प्रभारी डॉ.आरिफ सिद्दीकी ने बताया कि वह आशा व अन्य कर्मचारियों को क्लोरीन की 70 हजार गोलियां वितरण के लिए दे चुके हैं। लगातार वितरण किया जा रहा है।