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Farrukhabad News: नरौरा बैराज से 25 लाख क्यूसेक पानी छोड़ने की तैयारी

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संवाद न्यूज एजेंसी
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फर्रुखाबाद। पहाड़ पर बेशुमार बारिश जिले में कहर बरपा रही है। नरौरा बैराज में 25 लाख क्यूसेक पानी अधिक हो गया। इसे छोड़ने का क्रम शुरू कर दिया गया है। इससे आशंका है कि 13 साल पहले केदारनाथ आपदा के वक्त पांचाल घाट पुल पर लगे मीटर गेज का लेवल रिकार्ड तोड़ देगा। गुरुवार को आठ घंटे में जलस्तर पांच सेमी बढ़ गया जबकि बैराज से पानी छोड़ने की मात्रा भी तेजी से बढ़ाई जा रही है। शाम तक 3.05 लाख क्यूसेक पानी पहुंच गया है। बाढ़ की विभीषिका की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन सतर्क है।
उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश में एक माह से भीषण बारिश के चलते गंगा की स्थिति बेहद खराब हो रही है। वर्ष 2010 में अगस्त माह में केदारनाथ आपदा के वक्त सबसे अधिक 6,01,030 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। उस दौरान पांचाल घाट स्थित पुल पर 137.70 मीटर जलस्तर पहुंच गया था। रामगंगा में 3,21,619 क्यूसेक पानी छोड़ा था, तब मीटर 138.45 मीटर पर पहुंचा था। उस वक्त गंगा और रामगंगा के बीच कंपिल, कायमगंज, शमसाबाद, अमृतपुर, राजेपुर, कड़हर तक के सभी गांव जलमग्न हो गए थे।
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सड़कें कटने से संपर्क टूट गया था। हालांकि यह बाढ़ एक सप्ताह में ही खत्म हो गई थी। मगर इस ऐसा पहली बार हो रहा है कि सबसे अधिक एक माह बाद भी बाढ़ की विभीषिका कायम है। गुरुवार सुबह 2,94,525 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, तब पांचाल घाट गंगा पुल पर मीटर 137.35 मीटर पर पहुंच गया। दोपहर दो बजे पानी छोड़ने की मात्रा 3,05,041 क्यूसेक पहुंच गई जबकि मीटर गेज पांच सेंटीमीटर (सेमी.) बढ़कर 137.35 पर पहुंच गया।
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता दुर्ण कुमार की मानें तो नरौरा बैराज में 25 लाख क्यूसेक पानी अधिक स्टोर है। उसे 20 अगस्त तक निकालने की बात कही जा रही है। यही वजह है कि लगातार पानी छोड़ने की मात्रा बढ़ रही है। इससे केदारनाथ आपदा के वक्त पहुंचा मीटर गेट से ऊपर गंगा में जलस्तर होगा। यदि ऐसा होता है, तो गांवों में रह रहे लोगों की स्थिति और अधिक खराब होगी। बाढ़ की विभीषिका की आशंका को देखते हुए डीएम और एसपी ने जायजा लेना शुरू कर दिया है।


सबसे अधिक दिनों तक बाढ़ का बना रिकार्ड
सिंचाई विभाग के रिकार्ड में सबसे अधिक बाढ़ वर्ष 2010 में केदारनाथ आपदा के वक्त आई थी। यह बाढ़ एक सप्ताह से अधिक समय तक रही। जल स्तर भी रिकार्ड 137.70 मीटर तक पहुंचा था। इस बार अभी तक बाढ़ को एक माह बीत चुका है। सैकड़ों गांव जलमग्न हैं। फिलहाल इन्हें राहत मिलना मुश्किल दिख रहा है।
...तो बाढ़ से हालात होते बेकाबू
गनीमत है कि गंगा की तरह रामगंगा रौद्र रूप नहीं दिखा रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जिस तरह गंगा में बाढ़ का कहर बना हुआ है, उसी तरह यदि रामगंगा में भी जलस्तर बढ़ता, तो स्थिति बेकाबू हो जाती। गंगा का अधिक पानी कई स्थानों पर रामगंगा की ओर जा रहा है। लिहाजा कुछ राहत मानी जा रही है।

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फोटो


घरों को बाढ़ के हवाले कर रिश्तेदारों की ओर चले पीड़ित
अमृतपुर। नरौरा बैराज से गंगा नदी में चार दिन से लगातार दो लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा जा रहा है। एक माह से बाढ़ के पानी के बीच में गुजर कर रहे लोगों की हिम्मत टूट गई है। अब लोगों ने घरों को बाढ़ के हवाले करके पलायन शुरू कर दिया है। कुछ दूर सूखे स्थानों पर सड़क किनारे रुकने लगे हैं, तो बड़ी संख्या में लोग रिश्तेदारियों में जाने लगे हैं।
पट्टीदारापुर के रमाशंकर, राकेश, वीरेंद्र सरवन, गांव बरुआ के महेश विनोद, गांव कुड़री सारंगपुर के राजवीर, अन्नू, सूरजपाल, वीरसहाय, श्याम बाबू, गोपाल, करीब 70 से अधिक ग्रामीण अपने अपने घरों से सामान निकाल कर पशुओं के साथ रिश्तेदारी में चले गए। गांव राममूर्ति बैलगाड़ी पर बाइक, गृहस्थी का सामान लादकर परिवार के साथ रिश्तेदारी के लिए निकल पड़े। राममूर्ति ने बताया कि हरदोई में अपनी रिश्तेदारी में जा रहे हैं। वहां तक पहुंचने में दो दिन लग जाएंगे। बाढ़ से पूरा गांव घिरा है। अब खाना बनाने तक की जगह नहीं बची। गौटिया से इमादपुर सोमवंशी को जाने वाले पूरे मार्ग पर पानी बहने लगा है।
रामगंगा का जलस्तर 136.70 मीटर हो गया है इसमें पांच सेंमी की बढ़ोतरी हुई है। रामगंगा नदी में खो बैराज 9280, हरेली बैराज 291, रामनगर बैराज 3410 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। रामगंगा नदी चेतावनी बिन्दु से पांच सेमी ऊपर है। जलस्तर बढ़ने से अलादपुर भटौली, बेचेपट्टी, कोलासोता, गुड़ेरा, अमैयापुर, हीरानगर, गुलरिया, महोलिया, मोकलपुर, विरसिंहपुर, खरगपुर, खंडोली, सीढेचकरपुर, निसवी, राई, नहरैया आदि करीब 40 गांव के पास पानी पहुंच गया है। अलहादपुर भटौली में रामगंगा तेजी से कटान कर रही है। इससे पूरा गांव खतरे के जद में आ गया है।

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डीएम से सड़क कटने से रोके जाने की मांग की

गांव इमादपुर सोमवंशी के ग्राम प्रधान सुमन गुप्ता, संगीता शुक्ला ने तहसील पहुंचकर एसडीएम को प्रार्थना पत्र देकर कहा कि तहसील क्षेत्र के ग्रामीण एक माह से बाढ़ का प्रकोप झेल रहे हैं। इससे कई गांवों को जाने वाला रास्ते कट चुके हैं। गौटिया से कुबेरपुर के जाने वाला रास्ता कट चुका है। बदायूं मार्ग से अलीगढ़ होते हुए भुड़िया भेड़ा को जाने वाली सड़क भी कटने लगी है। कटी सड़क सही कराने की मांग एसडीएम से की। बाढ़ पीड़ित गांव को करीब 15 दिन पर्व राहत सामग्री वितरण की गई थी। वह खत्म हो चुकी है। लिहाजा दोबारा सामग्री वितरित की जाए।

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ब्लाक में पंहुचा बाढ़ का पानी

गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। तहसील क्षेत्र के 100 से अधिक गांव में पानी भरा हुआ है। बाढ़ का पानी राजेपुर बिजलीघर, बाल विकास परियोजना कार्यालय में भर गया है। ब्लाक में भी बाढ़ का पानी भरने लगा है। खंड विकास अधिकारी कौशल कुमार गुप्ता ने बताया कि आवास के पास पानी भर गया है।
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निबिया रोड बंद

राजेपुर तिराह पर बाढ़ का पानी बहने से निबिया को जाने वाली सड़क कट गई है। सड़क पर कई जगह गड्डे भी हो गए है। इससे वाहनों का निकलना मुश्किल हो गया है। एसडीएम रवींद्र सिंह ने थानाध्यक्ष राजेपुर को निबिया मार्ग बंद करने के आदेश दिए थे। थानाध्यक्ष ने राजेपुर तिराहा पर पुलिस लगाकर रास्ता बंद कर दिया है। फर्रुखाबाद आने जाने वाले वाहन डबरी तिराहा से होकर इटावा बरेली हाईवे से आते हैं।
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