मोहम्मदाबाद। बटाई पर खेत और कर्ज लेकर आलू तैयार किया तो भंडारण व भाव का संकट आ गया। हर ओर घाटे से आहत होकर किसान ने न तो शीतगृह का रुख किया और न ही मंडी का। उसने खेत में ही घूरे की तरह आलू फैला दिया। खेत में आलू फैलाते किसान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
जनपद में आलू के भंडारण और भाव की मंदी भले ही अधिकारी छिपाने में जुटे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत बयां हो ही जाती है। माटी के मोल बिक रहा आलू किसानों पर कर्ज का बोझ भी बढ़ा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में एक किसान खेत में लगे आलू के ढेर से तसले में फावड़े से आलू भरकर खेत में फैला रहा है।
जानकारी करने पर पता चला कि किसान मोहम्मदाबाद क्षेत्र के गांव बिहार निवासी शेर सिंह है। शेर सिंह ने बताया कि भूमिहीन होने के कारण उसने तीन बीघा खेत बटाई पर लेकर आलू बोया था। इसके लिए 18 पैकेट बीज 10 हजार रुपये का खरीदा। खेत की जोताई, बुआई, सिंचाई, खाद व आलू खोदाई पर खर्च किया। करीब 15 हजार रुपये उन पर कर्ज हो गया। आलू का उत्पादन अच्छा हुआ। गत वर्ष आलू का भाव अच्छा मिलने से इस बार भी मुनाफा होने की उम्मीद थी। उन्होंने अपनी बेटी की शादी तय कर दी थी। 22 फरवरी को बरात आनी थी। आलू का भाव सस्ता होने से उन्होंने बेटी की शादी अगले वर्ष के लिए टाल दी। आलू खोदकर खेत में ढेर लगा दिया। 15 दिन तक भाव बढ़ने का इंतजार किया।
शीतगृहों में भंडारण का संकट है। बोरा खरीदने और मंडी या शीतगृह आलू ले जाने के लिए भाड़े का पैसा कहां से आएगा। पहले से वह कर्ज में दबे हैं। और कर्ज न बढ़े, इसीलिए उन्होंने खेत में ही आलू फेंकना ठीक समझा। आलू सड़कर खेत में खाद का काम करेगा। इससे अगली फसल का उत्पादन अच्छा मिलेगा। अब गेहूं की फसल पर ही परिवार की रोजी-रोटी चलने की उम्मीद है।