फर्रुखाबाद। स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं में लाभार्थियों की संख्या में जमकर आंकड़ेबाजी चल रही है। योजना बदलने के साथ जिले की आबादी भी घट-बढ़ जाती है। वर्षों से आंकड़ों में चल रहे लाखों के अंतर पर किसी जिम्मेदार की नजर नहीं पड़ रही है। फिलहाल काम चलाया जा रहा है।
जनपद में फाइलेरिया उन्मूलन अभियान के तहत इन दिनों एमडीए कार्यक्रम चल रहा है। स्वास्थ्य टीमें घर-घर जाकर दो वर्ष से अधिक आयु के बच्चों, युवाओं, बुजुर्गों को एल्बेंडाजोल टेबलेट खिला रही हैं। इसमें दो वर्ष से कम आयु के बच्चे, गर्भवती महिलाएं व गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को दवाई नहीं खिलाई जानी है। इस अभियान में जनपद की आबादी 22 लाख 82 हजार 948 है। जबकि 20 लाख 54 हजार 658 लोगों को दवा खिलाने का लक्ष्य है। 10 अगस्त से चल रहे अभियान में 16 अगस्त तक 6 लाख 28 हजार 357 लोगों को दवा खिलाई जा चुकी है। दो सितंबर तक चलने वाले इस अभियान में हर वर्ष की तरह दवा खिलाने का लक्ष्य भी लगभग पूरा होने का दावा भी किया जाना तय है।
दूसरी ओर जनपद में प्रत्येक परिवार के प्रत्येक सदस्य की आभा आईडी बनाने का कार्यक्रम एक अप्रैल 2022 से चल रहा है। इसमें जनपद में कुल 19 लाख 37 हजार 300 लोगों की आभा आईडी बनाने का लक्ष्य है। दो वर्ष चार माह में 17 अगस्त तक 8 लाख 15 हजार 793 आभा आईडी बनी हैं। इस योजना में जिले की आबादी 19 लाख 37 हजार 300 रखी गई है। इस हिसाब से दोनों योजनाओं पर नजर डालें तो जिले की आबादी में 3,17,358 का अंतर है।
अब सवाल यह उठता है कि जिले की आबादी एमडीए अभियान की सही मानी जाए या फिर आभा आईडी के लक्ष्य की। इस पर किसी अधिकारी की नजर नहीं पहुंच रही है। आंकड़ेबाजी का खेल लगातार जारी है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि जहां पर काम करना होता है, वहां पर आबादी कम हो जाती है। जहां पर बजट का खेल है, वहां पर जनसंख्या बढ़ जाती है। यह उतार-चढ़ाव वर्षों से जारी है।
सीएमओ डॉ.अवनींद्र कुमार ने बताया कि दोनों योजनाओं में जिले की आबादी में अंतर व निर्धारित लक्ष्य तय होने के संबंध में जानकारी की जाएगी। पूछताछ के बाद कोई निर्णय लिया जाएगा।