फर्रुखाबाद। मिट्टी, बालू खनन व माल ढुलाई में दो हजार से अधिक ट्रैक्टर-ट्रॉली सड़कों पर खुलेआम फर्राटा भर रही हैं। एआरटीओ कार्यालय में 18 हजार ट्रैक्टर में महज 10 व्यवसायिक में पंजीकृत हैं। एक भी ट्रॉली का पंजीकरण नहीं कराया गया। ऐसे में सरकार को लाखों रुपये राजस्व का नुकसान हो रहा है। वहीं, आए दिन ट्रैक्टर-ट्रॉली से हो रही दुर्घटनाओं से अधिकारी सबक नहीं ले रहे हैं।
ट्रैक्टर-ट्रॉली से आए दिन हादसों में कई लोगों की जान चली गई। बहुत से लोग घायल होकर अपने अंग खो चुके हैं। सूबे के मुख्यमंत्री ने सड़क पर बालू, मिट्टी खनन व सवारियां बैठाकर ले जा रहे ट्रैक्टर-टॉलियों पर पूरी तरह रोक लगाने के आदेश दिए हैं। कुछ दिनों तक एआरटीओ प्रवर्तन व पुलिस ने थाना स्तर पर चेकिंग अभियान चलाकर कार्रवाई की। किसानों को ट्रैक्टर-ट्रॉली से कृषि कार्य करने के लिए जागरूक किया। इसके बाद अभियान ठंडे बस्ते में चला गया।
एआरटीओ कार्यालय में वर्तमान समय में 18 हजार ट्रैक्टर कृषि कार्य में पंजीकृत हैं। इसमें दस ट्रैक्टरों का पंजीकरण व्यवसायिक में करवाया गया। ट्रॉली बनाने के लिए जिले में कोई एजेंसी का ट्रेड नहीं है। ऐसे में यहां किसी ट्रॉली का पंजीकरण नहीं है। बिना पंजीकरण के व्यवसायिक कार्य में ट्रॉली धड़ल्ले से मुख्य मार्गों से गुजरती हैं।
उसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की जाती। खनन में पकड़ी जाने वाली ट्रैक्टर-ट्रॉली की रिपोर्ट खनन अधिकारी एआरटीओ कार्यालय नहीं भेजते हैं। इसके कारण उन पर जुर्माना भी नहीं लग पाता है। एआरटीओ प्रवर्तन सुभाष चंद्र राजपूत ने अभियान चलाकर कई ट्रैक्टर-ट्रॉली सीज किए गए हैं। उन्हाेंने बताया कि चेकिंग के दौरान पकड़े जाने पर ट्रैक्टर-ट्रॉली को सीज करने व जुर्माना जमा करवाने की कार्रवाई की जाती है।