फर्रुखाबाद। जिले में लोहिया अस्पताल में ही काली खांसी (डिप्थीरिया) के मरीज भर्ती करने की व्यवस्था है, लेकिन इलाज के लिए इंजेक्शन नहीं हैं। इससे मरीजों को रेफर किया जा रहा है। बुधवार दोपहर तक डॉक्टर के न बैठने से बच्चों को लेकर परिजन इलाज के लिए भटकते रहे।
डिप्थीरिया एक संक्रामक बीमारी है। यह संक्रमण एक-दूसरे से फैलने के साथ फेफड़ों तक अटैक करता है। बुखार आने पर बच्चों में यह बीमारी फैलने का खतरा अधिक रहता है। डिप्थीरिया के लक्षण वाले मरीजों का प्राथमिक उपचार सीएचसी कायमगंज व कमालगंज में करने की व्यवस्था है। गंभीर मरीज को आईसीयू की जरूरत होने से लोहिया अस्पताल रेफर किया जाता है।
सीएचसी में उपचार के लिए सीएमओ ने डिप्थीरिया एंटी टॉक्सिन (डाट) इंजेक्शन की लोकल खरीद करा ली है, लेकिन लोहिया अस्पताल में यह इंजेक्शन अब तक उपलब्ध नहीं है। इससे लोहिया अस्पताल में 20 बेड का पीकू वार्ड व 20 बेड का आइसोलेशन वार्ड भी बेकार साबित हो रहा है।
नहीं मिले डॉक्टर
लोहिया अस्पताल के पीकू वार्ड में दोपहर 12 बजे डॉक्टर मौजूद नहीं थे। कादरी गेट निवासी दुर्गा बाथम अपने बच्चे के इलाज के लिए डॉक्टर का इंतजार कर रही थीं। पूछने पर बताया कि वह 11 बजे आ गई थीं। उनके सात वर्षीय बेटे शुभ को लिवर में दिक्कत बताई जा रही है। उनके सामने तीन बच्चों के परिजन डॉक्टर न होने से लौट चुके हैं। वार्ड ब्वाय ने डॉक्टर को फोन किया, लेकिन डॉक्टर नहीं आए।
तीन बच्चे सैफई हो चुके रेफर
सीएचसी कायमगंज से तीन बच्चों को लोहिया अस्पताल और यहां से सैफई के लिए रेफर कर दिया गया। यहां इलाज के इंतजाम करने के बजाय रेफर कर पल्ला झाड़ने का खेल चल रहा है।
10 बच्चों की हो चुकी डिप्थीरिया जांच
कायमगंज क्षेत्र के गांव नगला धनी व कादर दादपुर निवासी बुखार पीड़ित बच्चों को सीएचसी में भर्ती कराया गया था। एक बच्चे की मौत भी हो चुकी है। डिप्थीरिया से मौत की आशंका पर स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया और सैंपलिंग की गई। डिप्थीरिया की आशंका पर 10 बच्चों के नमूने लेकर केजीएमयू लखनऊ में जांच कराई गई। इनमें आठ बच्चों की रिपोर्ट निगेटिव आने की जानकारी दी जा रही है। जबकि दो बच्चों की रिपोर्ट अभी नहीं आई है।
डिप्थीरिया के लक्षण
डिप्थीरिया जीवाणु के संक्रमण से बीमारी फैलती है। इसके जीवाणु मुंह, नाक व गले में रहते हैं। खांसने और छींकने से संक्रमण फैलता है। बारिश के मौसम में जीवाणु तेजी से फैलते हैं। इलाज में देरी होने पर जीवाणु पूरे शरीर में फैल जाते हैं।
डिप्थीरिया होने पर बच्चे को बुखार आना, सांस लेने में दिक्कत, गर्दन में सूजन, ठंड लगना, खांसी आने के दौरान आवाज में काफी अंतर होना, त्वचा का रंग नीला पड़ जाना, गले में खराश व बेचैनी होने से इसकी पहचान की जा सकती है।
इंजेक्शन की भेजी गई डिमांड
शासन से डिप्थीरिया एंटी टॉक्सिन इंजेक्शन की लोकल खरीद करने के आदेश हैं। सीएमओ ने सीरम की खरीद कराई है। उन्होंने कंपनी को मांगपत्र दिया है, अभी तक सीरम उपलब्ध नहीं हो सका है। बच्चों में डीपीटी के नियमित टीका लगने से डिप्थीरिया का खतरा नहीं रहता है। पीकू वार्ड में डॉ. विवेक सक्सेना के ड्यूटी पर न होने के संबंध में जवाब मांगा जाएगा।
डॉ. राजकुमार, सीएमएस, लोहिया अस्पताल