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किशोरी के अपहरण में नौ साल की सजा

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फर्रुखाबाद। फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम के न्यायाधीश नरेंद्र प्रकाश ने किशोरी का अपहरण करने में युवक को दोषी पाकर नौ साल की सजा सुनाई है। 10 हजार रुपये जुर्माना किया है। जुर्माना अदा न करने पर तीन माह की अतिरिक्त सजा भुगतने का प्रावधान किया है।
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शहर कोतवाली के एक मोहल्ला निवासी व्यक्ति की 17 वर्षीय पुत्री का 3 फरवरी 2003 को रेलवे स्टेशन फर्रुखाबाद के पास से अपहरण हो गया था।
कुछ दिन बाद एक युवक के शव के साथ किशोरी का शव कानपुर झांसी पैसेंजर ट्रेन में कालपी रेलवे स्टेशन पर मिला था।
जहर खाने से दोनों की मौत हुई थी। युवक के पास से सुसाइड नोट बरामद हुआ था। वह युवती की ओर से लिखा गया था।
इसमें होटल मालिक का कोई जुर्म न होने की बात कही थी, लेकिन पिता को अपनी मौत का जिम्मेदार बताया था। सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग का मिलान युवती की बोर्ड परीक्षा की कापियों से प्रयोगशाला में कराया गया तो उसकी राइटिंग नहीं निकली थी।
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सुसाइड नोट युवती के पिता को फंसाने के लिए फर्जी लिखा गया था।
किशोरी के पिता ने कमालगंज के गांव सरायमेदा निवासी अल्लाह रक्खा, शास्त्री नगर निवासी कैफूल व एक किशोर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
पुलिस ने जांच कर अपहरण व हत्या में आरोप पत्र दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अल्लाह रक्खा की मौत हो गई, किशोर की पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड भेज दी गई।
कैफूल के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई हुई। बचाव पक्ष के वकील व सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता तेज सिंह राजपूत ने दलीलें पेश कीं।
सुनवाई के बाद न्यायाधीश ने कैफूल को हत्या के जुर्म में दोषमुक्त दिया, लेकिन अपहरण के जुर्म में दोषी पाकर सजा और जुर्माने से दंडित किया है।
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