फर्रुखाबाद। जिम्मेदारों की लापरवाही कुपोषित बच्चों के जीवन को खतरा बन सकती है। पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) वार्ड फुल होने पर कुपोषित बच्चों को पीकू वार्ड में अन्य बीमारियों से ग्रसित बच्चों के साथ भर्ती किया जा रहा है। इससे कुपोषण के शिकार बच्चों में भी संक्रमण फैलने का खतरा है। एनआरसी में एक वार्ड को स्टाफ रूम बना दिया गया। जबकि अलग बने स्टाफ रूम में ताला लटका रहता है।
कुपोषित बच्चों के इलाज के लिए डॉ. राममनोहर लोहिया पुरुष अस्पताल में एनआरसी वार्ड अलग बना है। इसमें चार वार्ड हैं। एक वार्ड में बच्चों के खेलने की व्यवस्था और दो वार्डों में आठ बेड पड़े हैं। एक वार्ड में मरीज भर्ती करने के बजाय स्टाफ रूम का रूप दे दिया गया। जबकि एनआरसी का स्टाफ बैठने के लिए अलग से रूम की व्यवस्था है। उसमें हमेशा ताला पड़ा रहता है।
करीब आठ दिन से कुपोषित बच्चों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। सभी आठ बेड भरने के बाद कुपोषण का शिकार तीन बच्चों को एनआरसी वा़र्ड में भर्ती सर्दी, जुकाम, बुखार व अन्य संक्रामक बीमारियों से ग्रसित बच्चों के साथ भर्ती कर दिया गया। हालांकि इनका लिखित में इलाज एनआरसी वार्ड में ही चल रहा है। जिम्मेदारों की यह छोटी सी लापरवाही कुपोषित बच्चे के लिए कभी भी घातक हाे सकती है। इन बच्चों में संक्रामक रोगों से पीड़ित बच्चों का वायरस कभी भी प्रवेश कर सकता है।
मंगलवार तक तीन कुपोषित बच्चों का पीकू वार्ड में इलाज चल रहा था। बुधवार को दो बच्चों की छुट्टी की गई। राजेपुर के गांव जैनापुर निवासी आशीष और उनकी पत्नी मोनी ने अपनी डेढ़ साल की कुपोषित बेटी सौम्या को उपचार के लिए शनिवार को एनआरसी वार्ड में भर्ती कराया था। मां मोनी ने बताया कि वहां से पीकू वार्ड के दो नंबर बेड पर भेज दिया गया। तभी से उसका यहां इलाज चल रहा है। अन्य दो बच्चे चले गए।
सीएमओ डाॅ. अवनीेंद्र कुुमार ने बताया कि कुपोषित बच्चों को पीकू वार्ड में भर्ती कर उपचार करना गलत है। यदि पीकू वार्ड में कुपोषित बच्चे भर्ती किए गए हैं, तो इस संंबंध में वह स्पष्टीकरण तलब करेंगे। एनआरसी वार्ड के बैड भरे होने की स्थिति में कुपोषित बच्चों को किसी दूसरे वार्ड में भर्ती किया जना चाहिए।