संवाद न्यूज एजेंसी
फर्रुखाबाद। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी सेवाओं पर कम अपनी कमाई पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। लाखों की जीएसटी बकाएदार फर्म का जेम पोर्टल पर खेल कर चयन कर लिया गया। ऑडिट में जब फर्जी बिलों पर भुगतान का मामला फंसा तो अधिकारियों ने अपनी बचत के लिए फर्म को नोटिस थमाया है।
लोहिया अस्पताल में बिजली संबंधी कार्यों के लिए टेंडर डालकर चार वर्ष पूर्व फर्म चयनित की गई थी। वर्ष 2020 में कोरोना काल के दौरान उसी ठेकेदार को सीएमओ कार्यालय में भी उसी दर पर काम दे दिया गया। तब से नियमों को दरकिनार कर कमीशन के खेल में उसी फर्म के सहारे लाखों के वारे-न्यारे हो रहे हैं। सीएमओ कार्यालय में पांच वर्षों में नया टेंडर न कर अनुबंध विस्तार कर चहेती फर्मों से काम लिया जा रहा है।
खास बात तो यह है कि मनमाने तरीके से स्टेट बजट और एनएचएम बजट से करोड़ों की खरीद की गई। इसमें कई चहेती फर्मों को सीधे भुगतान कर दिया गया, जबकि कुछ फर्मों का जेम पोर्टल पर मनमाने तरीके से चयन किया गया। बताया जा रहा है कि बिजली का काम करने वाली फर्म को लोहिया अस्पताल से लेकर सीएमओ कार्यालय तक करोड़ों का भुगतान किया गया। इससे करीब 30 लाख रुपये से अधिक जीएसटी बकाया है।
डीएम ने जब फर्मों का अनुबंध विस्तार करने से पहले टेंडर की मूल पत्रावली तलब की। तो इस बीच सीएमओ कार्यालय में आनन-फानन छह मार्च को जेम पोर्टल पर बिड डालकर 21 अप्रैल को 30 लाख की जीएसटी बकाएदार फर्म का ही चयन कर लिया गया। ऑडिट हुआ तो फर्जी बिल से भुगतान का मामला फंस गया।
नियमों पर भी एक नजर
स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी की मानें तो निजी लाभ के लिए नियम तोड़े गए हैं। लोहिया अस्पताल से चयनित फर्म से सीएमओ कार्यालय में काम लिया जाना पूरी तरह नियम विरुद्ध है। इसी तरह टेंडर पटल प्रभारी लिपिक का सहायक एआरओ को बनाना भी उतना ही नियम विरुद्ध है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
सीएमओ डॉ.अवनींद्र कुमार ने बताया कि गत वित्तीय वर्ष में स्टेट बजट से करीब 60 लाख का भुगतान किया गया। एनएचएम से भुगतान की गणना की जा रही है। फर्जी बिल से भुगतान के मामले में नोटिस का संतोषजनक जवाब न मिलने पर फर्म के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी। जीएसटी बकाएदार फर्म के चयन की भी जांच कराई जाएगी।
भुगतान से पहले जीएसटी की एनओसी भी देखनी चाहिए थी। दूसरी ओर फर्म के पार्टनर ने बताया कि नए अनुबंध पर दो माह की बकाया जीएसटी के 60 हजार रुपये जमा कर दिए हैं। पिछली बकाया जीएसटी जमा कराने की प्रक्रिया चल रही है।