फर्रुखाबाद। डॉ. राममनोहर लोहिया महिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में नवजात को भर्ती करने के लिए तीन दिन से पिता चक्कर काटता रहा। इसके बावजूद भर्ती नहीं किया गया।
आखिरकार शुक्रवार को स्टाफ ने बच्ची का सीना दबाया, तो नाक से खून निकलते ही बच्ची की सांसें थम गईं। परिजन बच्ची का शव लेकर इमरजेंसी गेट पर डेढ़ घंटे तक रोते रहे। आरोप लगाया कि इलाज न मिलने से बच्ची की मौत हुई है। वह उच्चाधिकारियों से शिकायत करेंगे।
राजेपुर थाने के गांव राई निवासी सत्येंद्र सिंह और परिजन शुक्रवार दोपहर बाद लोहिया महिला अस्पताल की इमरजेंसी के सामने एक मासूम के शव को लेकर बैठ गए। उन्होंने एसएनसीयू वार्ड के स्टाफ पर मासूम को भर्ती न करने का आरोप लगाया।
सत्येंद्र ने बताया कि उनकी पत्नी रीता ने बुधवार को निजी अस्पताल में ऑपरेशन के बाद बच्ची को जन्म दिया। हालत बिगड़ने पर वह एसएनसीयू वार्ड लेकर पहुंचे। यहां बेड खाली न होने की बात कह दी। कई बार आग्रह करने पर रेफर की बात कह दी। वह उसे निजी अस्पताल ले गए। इसके बाद बृहस्पतिवार को भी लाए, फिर भी भर्ती नहीं किया गया।
आरोप लगाया कि शुक्रवार दोपहर बाद वह एसएनसीयू वार्ड पहुंचे, तो स्टाफ ने अभद्र भाषा का प्रयोग किया। एक महिला स्टाफ ने बच्ची को लिटाकर सीने में दबाया। इससे बच्ची की नाक से खून निकला और उसकी सांसें थम गईं। उन्होंने बताया कि यदि बच्ची को बुधवार को ही इलाज मिल जाता, तो जीवन बच जाता। काफी देर इंतजार के बाद पांचाल घाट पर बच्ची का जलप्रवाह कर दिया।
पिता सतेंद्र और चचेरे भाई श्यामवीर ने बताया कि वह इस मामले की उच्चाधिकारियों से शिकायत करेंगे। सीएमएस डॉ. कैलाश दुल्हानी ने बताया कि इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। किसी ने उन्हें बताया भी नहीं। यदि ऐसा है, तो वह जांच कराएंगे।