भतीजे का अपहरण कर चाचा की हत्या के मामले में विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी महेंद्र सिंह ने सात दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। दो आरोपी कोर्ट में हाजिर नहीं हुए। उनको फरार घोषित कर गैर जमानतीय वारंट जारी किए गए हैं। मोहम्मदाबाद कोतवाली क्षेत्र के गांव खजुरी निवासी रामचरन ने 17 नवंबर 2003 को भतीजे रामनिवास का अपहरण कर भाई लेखपाल की हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था।
इसमें बताया कि गांव के शिवशरन, ऋषिपाल, अनीत, बादाम भतीजे रामनिवास को कचहरी जाने के बहाने बुलाकर ले गए। इसके बाद रामनिवास वापस नहीं आया। रिश्तेदारी में तलाश करने पर भी पता नहीं चला। 19 नवंबर को भाई लेखपाल गांव के हरिनाथ के मकान पर रामनिवास के बारे में जानकारी करने गए। हरिनाथ घर पर नहीं मिले।
भाई लेखपाल गांव के राजेंद्र सिंह वर्मा के मकान के बाहर बैठ गए। तभी ऋषिपाल, शिवशरन, संजय, राजीव ने भाई लेखपाल की गोली मारकर हत्या कर दी थी। विवेचक ने छानबीन के बाद आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी। सोमवार को कोर्ट ने आरोपी शिवशरन, ऋषिपाल, अनीत, बादाम, रोशन, जर्मन, राजेंद्र को अपहरण व हत्या के दोषी करार दिया।
आरोपी शिवशरन व ऋषिपाल कोर्ट में हाजिर नहीं हुए थे। आरोपी संजय व राजीव के खिलाफ साक्ष्य न मिलने पर उनको बरी करने के आदेश दिए थे। मंगलवार को कोर्ट ने आरोपी शिवशरन, ऋषिपाल, अनीत, बादाम, रोशन, जर्मन, राजेंद्र को अपहरण व हत्या में आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
सभी आरोपियों को 25 हजार रुपये जुर्माना जमा करने के आदेश दिए। जुर्माना न देने पर दो वर्ष के अतिरिक्त कारावास की सजा का प्रावधान किया है। आरोपी शिवशरन व ऋषिपाल के कोर्ट में हाजिर न होने पर दोनों फरार घोषित कर गैर जमानतीय वारंट जारी करने के आदेश दिए हैं। अभियोजन पक्ष की ओर से अशोक कटियार, अनुज प्रताप सिंह व पूर्व शासकीय अधिवक्ता सुरेंद्र सिंह ने दलीलें दीं।