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Farrukhabad News: बंजर जमीन को मेहनत से सींचा, बागवानी से खिल उठे स्वावलंबन के फूल

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कमालगंज। कृषि-वानिकी में महिलाओं के बड़े मजबूत कदमों से स्वावलंबन के फूल खिल रहे हैं। बीबीपुर के किसान स्वयं सहायता समूह की 12 महिलाओं ने ग्राम सभा की बंजर जमीन को अपनी मेहनत से सींच कर मिसाल कायम कर दी। दो साल में नौ बीघा में अमरूद का बाग तैयार हो गया।
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बीबीपुर के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय के पास ग्राम सभा की नौ बीघा बंजर जमीन दो साल पहले गांव के किसान स्वयं सहायता समूह को दी गई थी। समूह की 12 महिलाओं ने 2021 में अपनी मेहनत और जज्बे से जमीन को उपजाऊ बनाकर 250 अमरूद के पौधे लगाए। किनारे-किनारे 200 पौधे करौंधा के भी रोपित किए। समर्पण के साथ लगातार देखभाल से पौधे बड़े होने लगे। पहली फसल में हर पेड़ पर 10 किलो तक अमरूद लगे। आसपास के सरकारी विद्यालयों के बच्चों को भी ताजे अमरूद उपलब्ध हुए। अब तीन माह बाद दूसरी फसल तैयार होने को है। करौंदा के पेड़ भी बड़े हो गए, उनमें भी फसल आएगी। समूह की महिलाओं ने तुरई, भिंडी, कद्दू, रौंसा, टमाटर, मिर्च, लौकी, दरारी की छियां आदि की सब्जी उगाकर भी छाप छोड़ी। जैविक विधि से तैयार सब्जियों की खासी मांग रही।

समूह की अध्यक्ष अंजली का कहना है कि जब बंजर जमीन समूह को मिली थी। सचिव दुर्गा, कोषाध्यक्ष फूलन देवी व अन्य सदस्यों ने एक स्वर से संकल्प लिया था, कि कृषि-वानिकी भी महिलाओं के लिए स्वावलंबन का बड़ा जरिया हो सकता है। संकल्पों को हर हालत में सफलता की सीढ़ी तक ले जाना है। आखिर जी तोड़ मेहनत रंग लाई। कृषि-वानिकी से स्वावलंबन के फूल खिलने लगे। अंजली का कहना है कि गरीब महिलाओं की सामाजिक मजबूती के लिए आर्थिक सशक्तिकरण जरूरी है। समूह की महिलाएं बालिका शिक्षा के प्रसार, बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता अभियान भी चला रहीं।
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