फर्रुखाबाद। एनीमिया से निजात दिलाने के लिए स्कूलों में भेजी गईं आयरन की हजारों गोलियां डंप हैं। यह गोलियां बच्चों को बांटी ही नहीं जा रही हैं। कुछ स्कूलों में यह गोलियां कबाड़ में पड़ी हैं। इससे बच्चों एनीमिया से कैसे मुक्ति मिलेगी।
बच्चों को एनीमिया मुक्त करने के लिए स्कूलों में हजारों की तादाद में आयरन की गोलियां बांटी जाती हैं। स्वास्थ्य विभाग इन गोलियाें का स्टाक बीआरसी पर भेजकर अपनी औपचारिकता पूरी करता है। बीआरसी से प्रधानाध्यापकों को आयरन की गोलियाें के डिब्बे थमा दिए जाते हैं। इसके बाद स्कूलों में यह गोलियां डंप रहती हैं। कई बार तो बच्चों को गोलियां वितरित न किए जाने से एक्सपायर होने पर फेंक दी जाती हैं।
नवाबगंज ब्लाॅक क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय हुसैनपुर बांगर में आयरन एंड फोलिक एसिड टैबलेट, फेरस सल्फेट एंड फोलिक एसिड टैबलेट के दर्जनों डिब्बे रखे थे। एक डिब्बे में 600 गोलियां होती हैं। पूछने पर बताया गया कि फरवरी में दवाई मिली थी, तभी बच्चों को खिलाई गई थी। यही हाल प्राथमिक विद्यालय फतनपुर में भी दिखा।
प्राथमिक विद्यालय नगला झब्बू सिंह में तो आयरन की गोलियां कबाड़ में पड़ी हैं। मोहम्मदाबाद के राजीव नगर स्थित कन्या प्राथमिक विद्यालय में आयरन की गोलियों के 25 डिब्बे रखे थे। यहां 116 बच्चे पंजीकृत हैं। प्रधानाध्यापिका गीता चौहान ने बताया कि 64 बच्चों ने दवा खाई है। लेकिन उन्होंने दवा खिलाने का रजिस्टर नहीं दिखाया। बच्चों ने बताया कि कई माह बाद दवा खिलाई जाती है। कुछ ने दवा मिलने से ही इन्कार कर दिया।
सीएमओ बोले, कराएंगे निगरानी
सीएमओ डॉ.अवनींद्र कुमार ने बताया कि बच्चों को प्रत्येक सप्ताह में सोमवार को भोजन के बाद आयरन की गोली खिलाने के आदेश हैं। इससे बच्चे एनीमिया के शिकार नहीं होंगे। उन्होंने बताया कि स्कूलों में आयरन की गोली डंप करना गलत है। यह शिक्षकों की लापरवाही है। वह संबंधित सीएचसी प्रभारियों से प्रत्येक स्कूल की निगरानी कराकर दवा खिलाने वाले रजिस्टर भी चेक कराएंगे। जिस स्कूल में बच्चों को आयरन की गोलियां नहीं खिलाई जा रही हैं, उसके खिलाफ बीएसए को रिपोर्ट भेजी जाएगी।