फर्रुखाबाद। दो माह से बाढ़ से जूझ रहे ग्रामीणों के पैर की उंगलियों में संक्रमण होने लगा है। गर्भवती महिलाओं और मरीजों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाने का एकमात्र सहारा नाव ही है। वहीं बाढ़ से ग्रसित लोग दूषित पानी पीने के लिए मजबूर हैं।
जनपद के राजेपुर, अमृतपुर, शमसाबाद, कमालगंज, कायमगंज और कंपिल क्षेत्र के इलाके बाढ़ की चपेट में हैं। खेताें में पानी भरा हुआ है। ग्रामीणों को फसल और पशुओं के चारे के लिए खेत पर जाना मजबूरी है। बाढ़ के पानी से पैरों की उंगलियों में संक्रमण होने लगा है।
चिकित्सकों की टीम न पहुंचने से पैरों में सरसों का तेल लगाकर राहत पाने की कोशिश हो रही है। कंपिल क्षेत्र के गांव टपुआ चौड़ेरा के सभी संपर्क मार्गों पर पानी भरा है। ग्रामीणों ने बताया कि चिकित्सकों की टीम गांव में नहीं पहुंच रही है। चारों ओर बाढ़ का पानी भरा होने से बुखार और खांसी के मरीज भी बढ़ रहे हैं।
बाढ़ग्रस्त क्षेत्र के मरीजों को अस्पताल लगाने का एकमात्र जरिया नाव बची है। ग्रामीणों का कहना है कि शासन की ओर से बनाए गए बाढ़ शरणालय शोपीस बने हुए हैं।
गांव राजापुर गंगादीप निवासी रामसेवक ने बताया कि इस महीने राशन भी नहीं बंटा है। घर में जो था वह धीरे-धीरे समाप्त हो चला है। प्रशासन की ओर से अभी तक राहत सामग्री भी नहीं भेजी गई है।