फर्रुखाबाद। फर्रुखाबाद सोशल वेलफेयर सोसाइटी की देखरेख में शुक्रवार रात मुशायरा व कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। दूरदराज से आए शायरों ने सभी को दाद देने के लिए मजबूर कर दिया। शनिवार सुबह तीन बजे तक पंडाल श्रोताओं से भरा रहा।
शहर के मोहल्ला शमशेर खानी के मैदान में शुक्रवार रात हुई एक शाम रईस अहमद के नाम कार्यक्रम में कई जिलों से आए नामचीन शायरों और कवियों ने समां बांध दिया। शायरा शहिस्ता सना ने गीत पढ़ा, जब बाग में कोयल बोली साजन आ गए... तो श्रोता खड़े होकर दाद देने को मजबूर हो गए। कन्नौज की आयशा खुशनसीब ने कहा, मैं खुशनसीब हूं मैं हिंदुस्तान में रहती हूं पर खूब तालियां बजीं।
डॉ. आसिम मकनपुरी ने सुनाया, ख़ामियां मेरी दिखाता था मुझे, मैंने आईना पलटकर रख दिया। संचालन कर रहे श्रृंगार के शायर हिलाल बदायूंनी ने कलाम पढ़ा, मुझे तुमसे बात करनी है, रात में मेरा फोन रिसीव कर लेना, सुनकर लोगों ने खूब तालियां बजाईं।
हास्य कवि दिलीप दुबे को सुनकर लोग ठहाके लगाकर लोटपोट हो गए। शाहबाज तालिब ने एक मुजाहिद मेरी बस्ती से नहीं निकलेगा, सौ मुनाफ़िक़ मेरे लश्कर से निकल आएंगे पढ़ा। पपलू लखनवी, कवि विशाल विशेष ने भी काव्यपाठ किया। मुशायरा और कवि सम्मेलन के अतिथि श्रम विभाग के नोडल अधिकारी सैय्यद रिजवान अली, सपा नेता अविनाश सिंह विक्की, हाजी अहमद अंसारी ने शमां रोशन कर आगाज किया।
आयोजक में आरिफ खान, आफाक खान, शरजील पाशा, दानिश मिर्जा, असगर हुसैन, फुरकान अहमद, पुष्पेंद्र भदौरिया आदि का सहयोग रहा।