फर्रुखाबाद। जिला नगरीय विकास अभिकरण कार्यालय (डूडा) में शहर के विकास की योजनाएं तैयार की जाती हैं। सड़क से लेकर लोगों को रोजगार, बेघरों को छत देना और महिलाओं को स्वावलंबी बनाए जाने का मसौदा भी इसी कार्यालय में बनता है।
अफसोस मौजूदा समय में डूडा कार्यालय उधार की फौज से विकास की जंग लड़ रहा है। कार्यालय में परियोजना अधिकारी, लेेखाकार व बाबू से लेकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तक की तैनाती नहीं है। इससे सालों से शहर के विकास कार्य अधूरे चल रहे हैं।
जिला नगरीय विकास अभिकरण कार्यालय (डूडा) में पीएम आवास योजना (शहरी), पीएम स्वनिधि, दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (एनयूएलएम) व मुख्यमंत्री नगरीय अल्पविकसित व मलिन बस्ती विकास आदि योजनाएं संचालित हैं। मगर इन योजनाओं की निगरानी करने वाले मुखिया जिला परियोजना अधिकारी (पीडी डूडा) का पद करीब दो साल से खाली चल रहा है। वर्ष 2022 में पीओ डूडा जय विजय सिंह का स्थानांतरण हुआ था, तब से पद खाली पड़ा है।
वहीं, वर्ष 2018 में स्थानांतरित हुए सहायक लेखाकार राकेश द्विवेदी के बाद कोई सहायक लेखाकार नहीं आया। बाबू व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तक की तैनाती नहीं है। एएसडीएम अतुल कुमार प्रभारी पीओ डूडा हैं। जिला पंचायत के बाबू गौरव कुमार को डूडा कार्यालय में संबंद्ध किया गया है।
सहायक लेखाकार का अतिरिक्त चार्ज डीआईओएस के लेखाकार प्रियांक दुबे के पास है। एनयूएलएम की सिटी मिशन प्रबंधक मेघा गुप्ता की डूडा में करीब चार माह पहले ही तैनाती हुई है। स्थायी पीओ व लेखाकार आदि कर्मचारियों के न होने से विकास की रफ्तार धीमी है।
विकास की कई फाइलें पड़ीं डंप
करीब दो साल होने आ रहे हैं और अभी तक डूडा स्वीकृत 84 सड़कों का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं करा पाया है। बजट के लिए पत्र तो सूडा कार्यालय लखनऊ भेजे जाते हैं, लेकिन इसके बाद अफसर भूल जाते। कांशीराम कॉलोनियों में रह रहे अवैध लोगों से आवास भी नहीं खाली कराए जा रहे। प्रभारी पीओ के समय से कार्यालय में न बैठने के चलते एनयूएलएम के तहत समूहों के गठन की फाइलें भी नहीं हो पा रही हैं।
बोले जिम्मेदार
जिला नगरीय विकास अभिकरण कार्यालय (डूडा) फर्रुखाबाद में अधिकारियों की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही अधिकारियों व कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी।
- आनंद शुक्ल, सहायक निदेशक, सूडा लखनऊ