संवाद न्यूज एजेंसी
अमृतपुर। गंगा का जलस्तर खतरे के निशान 137.10 मीटर पर स्थिर है जबकि रामगंगा के जलस्तर में 15 सेंटीमीटर (सेमी) उछाल आया है। दो दिन से रामगंगा का बढ़ रहे जलस्तर से ग्रामीण चिंतित हैं। बाढ़ पीड़ितों को रोटी के लाले और दवा के लिए पैसे नहीं है।
गंगा में लगातार पानी छोड़े जाने से जलस्तर खतरे के निशान पर है। बुधवार को नरौरा बांध से गंगा में एक लाख 62120 क्यूसेक पानी और छोड़ा गया है। इससे जलस्तर बढ़ने की आशंका है। ग्रामीणों का कहना है कि रामगंगा में बाढ़ आ गई तो तहसील क्षेत्र के सभी 172 गांव बाढ़ से प्रभावित हो जाएंगे। गंगा की बाढ़ की एक माह से झेल रहे हैं। रामगंगा में बाढ़ आई तो क्षेत्र की स्थित भयावह हो जाएगी।
बाढ़ पीडि़तों को दो वक्त की रोटी के लाले हैं। गंगा का जलस्तर कम होने का नाम नहीं ले रहा है। गांव हरसिंहपुर कायस्थ, तीसराम की मड़ैया, रामपुर, जोगराजपुर कुड़री सारंगपुर, मंझा, जटपुरा कहिलियाई, सुंदरपुर, कछुआ गाढ़ा, सैदापुर आदि बाढ़ प्रभावित गांव की हालत दयनीय है। ग्रामीणों का कहना है कि काम के लिए वह लोग कहीं नहीं जा पा रहे। रास्तों व घरों में पानी भरा है। जुकाम, बुखार, आखों की बीमारी फैली है। अनाज के लिए रुपये नहीं तो दवा कहां से लाएं। प्रशासन 31 गांव में राशन वितरण करने के बाद बैठ गया है।
राहत सामग्री भी खत्म हो चुकी है। कोई अधिकारी गांव में झांकने तक नहीं आता। चित्रकूट डिप को पूरी तरह पीडब्ल्यूडी के द्वारा बंद कर दिया गया है। एक तरफ एक होमगार्ड, तो दूसरी ओर 112 की गाड़ी खड़ी रहती है। डिप पर पानी की तेज धार चल रही है। इसके बाद भी ग्रामीण पैदल निकल रहे हैं। रामगंगा का जलस्तर 135.50 मीटर से बढ़कर 135.65 मीटर पर पहुंच गया है। रामनगर बैराज से 4875 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
रामगंगा में पानी बढ़ने से गांव कोलासोता, हीरानगर, गुलरिया, भावन, चिड़िया महोलिया, अलादपुर भटौली, निसवी, राई, खरगपुर, खंडौली के ग्रामीण भयभीत हैं।