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Farrukhabad News: गंगा घटी, पर रास्तों में अभी भी पानी भरा

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फर्रुखाबाद। गंगा का जलस्तर रविवार को 10 सेमी घटने के बावजूद चेतावनी बिंदु से 25 सेमी ऊपर है। इससे बाढ़ पीड़ितों की समस्या कम होने का नाम नहीं ले रही है। अमृतपुर क्षेत्र के 50 गांवों की बिजली गुल है। वहीं, रास्तों में पानी भरा होने से आवागमन बाधित है।
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गंगा का जलस्तर रविवार को 10 सेमी घटकर 136.85 मीटर पर पहुंच गया है। जो अभी खतरे के निशान से 30 सेमी नीचे व चेतावनी बिंदु 136.60 मीटर से 25 सेमी ऊपर है। नरौरा बांध से गंगा में 99 हजार 613 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। बदायूं मार्ग चित्रकूट डिप पर करीब एक फुट पानी बह रहा है। यहां वाहन पानी से होकर ही गुजर रहे हैं। हालांकि पुलिस ने सुरक्षा की दृष्टि से डिप के दोनों ओर बैरिकेडिंग करा दी है।
रामगंगा का जलस्तर 135.40 मीटर से 25 सेमी. घटकर 135.15 मीटर पर आ गया है। खो हरेली रामनगर बैराज से 4461 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। हालांकि क्षेत्र के बाढ़ग्रस्त गांवों में समस्याएं बरकरार हैं। संपर्क मार्गों पर पानी भरा होने से नाव ही आवागमन का सहारा है।
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50 गांवों की बिजली आपूर्ति बंद होने से बाढ़ पीड़ित अंधेरे में रात गुजारने के लिए मजबूर हैं। खेतों में पानी भरा होने से ग्रामीणों के सामने पशुओं के चारे की सबसे बड़ी समस्या है।

बाढ़ पीड़ितों को बांटी राहत सामग्री
राजेपुर। गंगा की बाढ़ से क्षेत्र के गांव तीसराम की मड़ैया, सबलपुर, कंचनपुर, उदयपुर, भुड़ियां भेड़ा, कुसुमापुर, कुतलूपुर, भाऊपुर चौरासी के संपर्क मार्ग टूट गए हैं। इससे आवागमन में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जमापुर के निकट पर डॉ.प्रमित राजपूत, थानाध्यक्ष राजेपुर योगेंद्र सोलंकी की मौजूदगी में गांव भुड्डन की मड़ैया, चाचूपुर 125 बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री बांटी गई। थानाध्यक्ष योगेंद्र सोलंकी ने ट्रैक्टर पर बैठकर बाढ़ग्रस्त गांव उदयपुर, कंचनपुर, सबलपुर का भ्रमण किया। उन्होंने ग्रामीणों को बाढ़ के पानी में न घुसने व नाव से ही आवागमन करने की सलाह दी।
बाढ़ का पानी कम होने से राहगीरों को राहत

शमसाबाद। क्षेत्र के गांव चौरा गांव के सामने शाहजहांपुर-शमशाबाद मुख्य मार्ग पर पानी कम होने राहगीरों को राहत मिली है। इससे बाइक सवार भी निकलने लगे हैं। बाढ़ग्रस्त गांव झौआ से कटरी तौफीक मार्ग पर गहरे गड्ढे होने से बाइकों का निकलना मुश्किल है। ग्रामीण ट्रैक्टर से ही आवागमन कर रहे हैं। बाढ़ से घिरे गांव कमथरी, चितार के ग्रामीणों को आने-जाने के लिए नाव ही सहारा है। समैचीपुर के ग्रामीण ढाईघाट मार्ग के किनारे झोपड़ी डालकर रह रहे हैं। हैंडपंप पानी में डूब गए। (संवाद)
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