फर्रुखाबाद। सपा के निवर्तमान जिलाध्यक्ष नदीम अहमद फारूकी पर बलवा, धार्मिक उन्माद, लोकसेवक पर हमला समेत कई संगीन धाराओं में दर्ज मुकदमे में गिरफ्तारी स्टे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया।
इसके बाद कभी भी उनकी गिरफ्तारी की जा सकती है।
शमसाबाद निवासी एक महिला ने अक्तूबर 2020 में काजी टोला निवासी सपा के निवर्तमान जिलाध्यक्ष नदीम अहमद फारूकी, साथी शमीम, रजी, रवी, मेराज, धर्मेंद्र, जिलाध्यक्ष के गार्ड व दो अज्ञात पर जमीन पर अवैध कब्जा करने के विरोध में घर में घुसकर मारपीट, छेड़छाड़, जान से मारने के लिए फायर करने का मुकदमा दर्ज कराया था।
इसमें नदीम फारूकी को जेल जाना पड़ा था। चार नवंबर को रिहाई के बाद शमसाबाद में जुलूस निकालकर नारेबाजी की गई।
इसमें पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष विजय कुमार गुप्ता ने नदीम अहमद फारूकी, अब्दुल्ला, आजम, मसूद, सकेब, मेराज, एजाज, धर्मेंद्र, मुसब्बर, गुलजार, शकील उर्फ पप्पू समेत 18 नामजद और 500 अज्ञात पर मुकदमा दर्ज कराया था।
नदीम अहमद फारूकी ने हाईकोर्ट से 23 नवंबर 2020 को गिरफ्तारी स्थगनादेश हासिल कर लिया था।
इस मामले की 12 अक्तूबर 2022 को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता नदीम अहमद फारूकी न तो स्वयं हाजिर हुए और न ही उनके अधिवक्ता अदालत में पहुंचे।
लिहाजा हाईकोर्ट ने स्थगनादेश खारिज कर दिया। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब सपा नेता समेत नामजद और अज्ञात पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है।
निवर्तमान जिलाध्यक्ष नदीम अहमद फारूकी ने बताया कि अधिवक्ता दूसरे कोर्ट में थे। फिर स्टे के लिए आवेदन कर दिया है। दो-चार दिन में दोबारा स्थनादेश हो जाएगा।