फर्रुखाबाद-अमृतपुर। गंगा में बाढ़ का रौद्र रूप खतरनाक होता जा रहा है। उधर, बरेली-इटावा राष्ट्रीय राजमार्ग के नीचे से पानी का रिसाव शुरू होने से खलबली मच गया। एसडीएम की सूचना पर पहुंची हाइवे के अफसरों ने रिसाव बंद कराना शुरू कर दिया। पुलिस बल के साथ अधिकारी मौके पर मुस्तैद हैं। आसपास गांवों में बाढ़ की दुश्वारियां बढ़ती जा रही हैं। राहत कार्य के प्रशासनिक दावे हवाई साबित हो रहे हैं। जलस्तर खतरे के निशान से 20 सेंमी ऊपर पहुंचने से खतरा और बढ़ता जा रहा है।
पहाड़ों पर मूसलाधार बारिश के चलते नरौरा बैराज से एक सप्ताह से दो लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा जा रहा है। इससे बाढ़ रौद्र रूप लेती जा रही है। जिले में 150 से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में हैं। बरेली-इटावा राष्ट्रीय राजमार्ग पर निबिया चौराहे के पास हाइवे के नीचे से बाढ़ के पानी का रिसाव शुरू हो गया। किसी ने इसकी सूचना पीडब्ल्यूडी मंत्री जितिन प्रसाद को दे दी। उन्होंने डीएम को जानकारी दी। इससे प्रशासन में खलबली मच गई। सूचना मिलते ही अमृतपुर के एसडीएम, राजेपुर थाना पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने नेशनल हाइवे के इंजीनियर विश्वास मिश्रा को बुला लिया। इंजीनियरों की टीम ने रिसाव को रोकने का प्रयास शुरू कर दिया है। इंजीनियर विश्वास मिश्रा ने बताया कि दोनों तरफ पानी भरा है। रिसाव काफी कम है। यह चूहे आदि के छेद की वजह से भी हो सकता है। शीघ्र ही उसे बंद कर दिया जाएगा। बाढ़ क्षेत्र में हाइवे पर नजर है।
बाढ़ की वजह से मऊदरवाजा, शमसाबाद, राजेपुर, कमालगंज और अमृतपुर थाने के करीब 75 गांवों का सड़़क संपर्क टूट गया है। शनिवार को नरौरा बांध से गंगा में 1,80,348 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। पांचाल घाट पर गंगा खतरे के निशान से 20 सेमी ऊपर पहुंचकर 137.30 मीटर पर पहुंच गया है। रामगंगा का 135.65 मीटर पर स्थिर हैं।