कंपिल (फर्रुखाबाद)। गंगा का जलस्तर भले ही घट रहा हो, लेकिन कटान अभी भी तेजी से हो रहा है। इसके चलते आधा दर्जन से ज्यादा ग्रामीण भयभीत हैं। ग्रामीणों ने पक्के मकानों को तोड़कर सड़क किनारे व खेतों में झोपड़ी डालकर रहने लगे हैं।
क्षेत्र के गांव पथरामई, हुमायूं नगला, कारव, सींघनपुर, पुंथर दयामाफी समेत करीब आधा दर्जन से ज्यादा गांवों में कटान हो रहा है। कटान से जहां ग्रामीणों की सैकड़ो बीघा भूमि गंगा में समा गई है। वहीं, कई घर भी चपेट में आ रहे हैं। कटान के चलते ग्रामीणों ने पक्के मकान तोड़ने शुरू कर दिए हैं। गांव पथरामई में ग्रामीण मकान तोड़कर सड़क किनारे पन्नी तानकर गुजारा करने को मजबूर हैं।
गांव हुमायूं नगला के भी अधिकतर ग्रामीण मकान तोड़कर जा चुके हैं। कुछ रह गए ग्रामीण भी अपना मकान तोड़ रहे हैं। गांव सींघनपुर, कारव, पुंथर दयामाफी और रामसिंह का नगला आदि गांव के खेतों में भी तेजी से कटान हो रहा है। इससे इन गांवों का अस्तित्व खतरे में है। बाढ़ग्रस्त गांवों में बीमारियां भी पांव पसार रही हैं। झब्बू, रामऔतार, दलवीर, नवाब सहित कई परिवार बुखार, खुजली, एलर्जी आदि से पीड़ित हैं। स्वास्थ्य विभाग के सुधि न लेने से ग्रामीण झोलाछाप से इलाज कराने को मजबूर हैं। पशुओं में भी खुरपका, मुंहपका व गला घोंटू रोग फैलने लगे हैं।
अमृतपुर प्रतिनिधि के अनुसार गंगा में आई बाढ़ समाप्त हो जाने के बाद क्षेत्र में संक्रामक बीमारी फैलने लगी हैं। इससे अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इमरजेंसी वार्ड में मरीजों के लिए बेड न होने से अस्पताल के हाॅल में बेड डलवाए गए हैं। फार्मासिस्ट आलोक कटियार ने बताया है कि इस समय 50 से अधिक मरीजों को भर्ती कर बोतल लगाई जा रही है। अस्पताल में डाॅ.रजत कटियार ने बताया कि जब से बाढ़ का पानी कम हुआ है तब से मरीजों की संख्या बढ़ी है। ओपीडी में प्रतिदिन 300 से अधिक मरीज देख रहे हैं। सबसे ज्यादा बुखार, जुकाम, खुजली व पेट खराब के मरीज आ रहे हैं। अस्पताल में दवा लेने के लिए मरीजों की भीड़ लगी रहती है। सीएमओ डॉ. दलवीर सिंह ने बताया कि बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में स्वास्थ्य टीम भेजी जाएगी।
बाढ़ का पानी उतरा तो कीचड़ से होकर निकल रहे ग्रामीण
अमृतपुर। गंगा में आई बाढ़ समाप्त हो जाने के बाद रास्ते में भरा पानी व कीचड़ से होकर ग्रामीण निकल रहे हैं। इससे ग्रामीण परेशान हैं। गंगा का जलस्तर सोमवार को 15 सेंटीमीटर घटकर 136.10 मीटर पर आ गया है। जो चेतावनी बिंदु से 50 सेंटीमीटर नीचे है। नरौरा बांध से गंगा में 33320 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। बाढ़ समाप्त होने के बाद भी ग्रामीणों की मुसीबतें कम नहीं हुईं। घरों में बाढ़ का पानी उतरने से अब कीचड़ हो गया है। कई गांव को जाने वाले मार्ग पर भी पानी व कीचड़ भरा है। गांव तीसराम की मड़ैया के रास्ते पर पानी भरा है। आशा की मड़ैया की पुलिया पर पानी कम होने से नाव नहीं चल पा रही है। इससे ग्रामीण पानी से होकर निकलने को मजबूर हैं। बरुआ जाने वाला मार्ग बाढ़ से कट गया। इससे अभी पानी भरा है। इससे ग्रामीणों को वाहन लाने-ले जाने में दिक्कत हो रही है। (संवाद)