संवाद न्यूज एजेंसी
फर्रुखाबाद। बाढ़ की विभीषिका अब और विकराल हो चली है। चहुं ओर बाढ़ का पानी भरने से अब अंतेष्टि करने का स्थान भी शेष नहीं है। राजेपुर क्षेत्र में रहने वाले लोग अपनों की चिताओं को इटावा-बरेली हाईवे के किनारे जलाने को मजबूर हैं।
गंगा नदी का जलस्तर विगत लगभग एक माह से खतरे के निशान से ऊपर है। वहीं रामगंगा ने भी अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। देखते ही देखते क्षेत्र की सैकड़ों बीद्या जमीन जलमग्न हो चुकी है। गंगापार इलाके के लोग अपनों की मृत्यु पर उत्तरी तट पर गंगा किनारे दाह संस्कार किया करते थे। गंगा से लेकर रामगगा के बीच के गांवों में जलभराव होने से अब अंतेष्टि के लिए भी स्थान शेष नहीं रह गया है। पानी कम होने के दौरान लोगों ने अपने खेतों में ही चिताएं जला ली थीं।
अब वहां भी जलभराव होने से इटावा-बरेली हाईवे के किनारे चिताओं को जलाने का सिलसिला जारी है। बुधवार और गुरुवार को हाईवे के किनारे करीब 12 चिताएं जलीं। अंतिम यात्रा मेश्साथ आए लोग देर तक सड़क किनारे बैठकर चिता पूरी जलने तक इंतजार करते रहे। ग्रामीणों का कहना है कि गंगा किनारे अंतिम संस्कार के लिए जाना पड़ता था, लेकिन अब तो गंगा घर के पास ही आ गई हैं। ऐसे में खेतों में लगाई गई चिताओं में जले उनके प्रियजनों को भी मुक्ति मिल रही है।
चिताओं के धुंए से हो रही यात्रियों को दिक्कत
सड़क किनारे जल रहीं चिताओं से सड़क से गुजर रहे ग्रामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। चिता से उठने वाला धुंआ आंखों में भरने से लोगों को दिक्कत हो रही है। इटावा से लिपुलेक तक जाने वाली इस सड़क पर बरेली, शाहजहांपुर, हरदोई, बदायूं जाने के लिए लोग गुजरते हैं। चिताओं से उठने वाला धुंआ और भीड़ कहीं जानलेवा न हो जाए। इसके लिए पुलिस व प्रशासन को इंतजाम करना होगा।