फर्रुखाबाद। शीतगृहों में इस बार आलू अधिक भंडारित होने के साथ निकासी काफी धीमी है। यह किसानों पर भारी पड़ सकती है। अभी तक मात्र 22 फीसद ही आलू निकाला जा सका है, जबकि दो माह बाद आलू की कच्ची फसल की बुआई शुरू हो जाएगी। दूसरे प्रदेशों से आलू की मांग न आने और कम समय में इतना आलू निकल पाना काफी मुश्किल माना जा रहा है।
जिले में प्रमुख रूप से आलू की खेती की जाती है। इस वर्ष सरकारी रिकार्ड के अनुसार 94 शीतगृहों में आठ लाख 56 हजार 570 मीट्रिक टन आलू भंडारित किया गया। जुलाई में अब छह दिन ही बचे हैं। अभी तक 22 फीसद आलू ही शीतगृहों से निकाला जा सका है। शीतगृहों में क्षमता से अधिक आलू भंडारित किया गया है। अभी गैलरी में भी आलू भरा है।
इससे सरकारी आंकड़ों से भी अधिक आलू भंडारित है। इन दिनों सामान्य आलू का भाव 670 रुपये से लेकर 700 रुपये प्रति बोरी (50 किलो) है, जबकि चिप्सोना व हालैंड प्रजाति का आलू 850 रुपये प्रति बोरी बिक रहा है। शीतगृहों में बंगाल, पंजाब, हरियाणा के व्यापारियों ने भी आलू भंडारित किया है।
व्यापारी अपना आलू निकाल रहे हैं, जबकि किसान अभी भाव बढ़ने की उम्मीद में आलू की निकासी नहीं कर रहा है। 15 सितंबर से आलू की कच्ची फसल बुआई की तैयारी शुरू हो जाती है। इसमें दो माह भी नहीं बचे हैं। दूसरे प्रदेशों से आलू की मांग भी नहीं आ रही है। जानकारों का कहना है कि धीमी गति से निकासी चली तो अंतिम दौर में आलू की दुर्दशा होना तय है।
मोहम्मदाबाद क्षेत्र के गांव पसनिंगपुर निवासी रामकुमार वर्मा उफ़ॱर भोले ने बताया कि उन्होंने 2800 बोरी आलू शीतगृह में भंडारित किए थे। अभी तक 800 बोरी आलू बेचा है। उम्मीद है कि 50 से 100 रुपये बोरी आलू का भाव बढ़ सकता है। भाव बढ़ने पर वह आलू बेचेंगे।
पसनिंगपुर निवासी विशम्भर दयाल ने बताया कि उन्होंने 450 बोरी आलू शीतगृह में रखे हैं। शीतगृह फुल होने से 400 बोरी आलू बेच दिया था। इस बार भी करीब 20 बीघा आलू बोयेंगे। भाव बढ़ने पर शीतगृृह से आलू बेचेंगे।
आलू व्यापारी अरविंद राजपूत ने बताया कि दूसरे प्रदेशों से आलू की मांग न आने से शीतगृहों से आलू की निकासी धीमी है। अभी कई शीतगृहों में 10 से 12 प्रतिशत ही आलू की निकासी हुई है। भाव अधिक बढ़ने की संभावना कम है। यदि इसी तरह धीमी गति से आलू की निकासी हुई तो अंतिम दौर में आलू शीतगृहों से फेंकना पड़ेगा।